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जशपुर :- जानिए क्यों इतना खास है कचनार


कचनार एक ऐसी वनस्पति है जिसके औषधीय गुण अन्य वनस्पतियों से भिन्न होते हैं, कचनार की 500 से अधिक प्रजातियां पायी जाती है, इनमें से कुछ जंगलों में एवं क़ुछ शोभकार पौधे के रूप में उद्यानों में उगाए जाते हैं, इसके फूल पीले, नीले, लाल, बैंगनी से लेकर दोरंगे भी होते हैं, भारत बांग्लादेश, बर्मा, भूटान, पाकिस्तान, श्रीलंका ,अमेरिका के गर्म क्षेत्रों की जलवायु में यह वनस्पति काफी बहुतायत में मिलती है, अध्ययन एवं प्राप्त प्रेक्षणों से ज्ञात हुआ है जशपुर जिले में भी यह वनस्पति मौसम एवं जलवायु के अनुकूल क्षेत्रों में पाई गई है, यह काफी दुर्लभ वनस्पति है, यदि वनस्पति का सरंक्षण कर लिया गया तो वनस्पति जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है,एक ऐसी दुर्लभ वनस्पति जिसका उपयोग सामान्य से लेकर गंभीर बीमारियों के निदान में किया जाता रहा है, आयुर्वेद में इसके लाभकारी गुणों के आख्यान उपलब्ध हैं, आमतौर पर इसके छाल का उपयोग गठिया, बवासीर, उपदंश, सर्दी जुकाम, वात रोगआदि में काफी लाभकारी होता है, इसके अलावा पौधे के फूल ,पतियों एवं बीजों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुणों से कई असाध्य रोगों का भी निदान सम्भव होता है* @@दीपक वर्मा@@



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