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जानिए...दिपावली के पर्व पर पूजा का विशेष महत्व


देवरिया: दीपावली संस्कृत भाषा का शब्द है। इसका अर्थ होता है ‘दीपकों की पंक्ति’। इस दिन प्रदोष काल यानी शाम के समय शुभ मुहूर्त के हिसाब से माता लक्ष्मी का पूजन श्री गणपति, माता सरस्वती, कुबेर देवता और मां काली के साथ किया जाता है। इस दिन पूजा में किसी तरह की कोई कमी न रह जाए, इसके लिए जरूरी है कि हमें पूजा की विधि और जरूरी सामग्री की पूरी जानकारी हो…

Image result for दिवाली माता लक्ष्मी का पूजन श्री गणपति, माता सरस्वती, कुबेर देवता और मां काली के साथ किया

पूजन सामग्री

कमल व गुलब के फूल, पान का पत्ता, रोली, केसर, चावल, सुपारी, फल, फूल, दूध, इत्र, खील, बताशे, मेवे, शहद, मिठाई, दही, गंगाजल, दीपक, रुई , कलावा, नारियल,तांबे का कलश, स्टील या चांदी का कलश, चांदी का सिक्का, आटा,तेल,लौंग,लाल कपड़ा, घी चौकी और एक थाली।

 

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पूजा विधि

-चौकी को साफ करने के बाद आटे की मदद से चौकी पर नवग्रह यंत्र बनाएं। स्टील के कलश में दूध, दही, शहद,गंगाजल, लौंग इत्यादि भरकर उस पर लाल कपड़ा बांध दें और उसके ऊपर नारियल विराजित कर दें। नवग्रह यंत्र पर चांदी का सिक्का रखें और लक्ष्मी-गणपति की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर गंगाजल से स्नान कराएं। रोली और अक्षत से टीका करें।

-भगवान के विग्रह के बाईं तरफ (यानी आपके दाहिनी तरफ) देसी घी का दीपक जलाएं। दाहिने हाथ से भगवान को इत्र, अक्षत, पुष्प, मिठाई, फूल और जल अर्पित करें।

-पहले से तैयार किए हुए पारंपरिक रीति के हिसाब से 11 या 21 सरसों तेल के दीये जलाकर रखें। इसके साथ ही 1,5 या 7 दीपक देसी घी के जलाएं।

-इसके बाद अपने दाहिने हाथ यानी सीधे हाथ में पुष्प और अक्षत लेकर लक्ष्मी, गणेश सहित सभी देवों का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प करें। इसके बाद सबसे पहले गणपति और लक्ष्मीजी का पूजन करें।

-फिर दीपक पर रोली और अक्षत से टीका करें और जीवन को प्रकाशित करने के लिए दीपक और अग्निदेव को धन्यवाद करें। इसके बाद महिलाएं माता लक्ष्मीजी को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। यह सामग्री किसी तो दान या उपहार में न दें। मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मानकर इसका स्वयं उपयोग करें। इससे मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी।

-इस दिन कार्यक्षेत्र में तरक्की पाने के लिए स्थिर लग्न में श्रीसूक्त का पाठ करें। इस पूजा में गणपति और लक्ष्मीजी के साथ भगवान विष्णु की स्थापना जरूर करें। श्रीहरि को लक्ष्मीजी के दाहिनी तरफ विराजित करें। इस दिन लक्ष्मी माता को कौड़ी और गोमती चक्र के साथ ही शंख और मोती अर्पित करने से मां की असीम कृपा प्राप्त होती है।

रिपोर्टर : दुर्गेश जायसवाल

 



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