Bye-Bye VVIP कल्चर: अब गंगा-यमुना के नाम से जानी जाएगी दर्शक दीर्घा!
भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस एक नई ऊर्जा के साथ मनाने जा रहा है। इस वर्ष का समारोह विशेष रूप से 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता और राष्ट्रगान 'वंदे मातरम्' के 150 गौरवशाली वर्षों को समर्पित है। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर इस बार इतिहास और आधुनिकता का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
1. झांकियों में दिखेगा भारत का वैभव
इस साल कुल 30 झांकियां परेड की शोभा बढ़ाएंगी, जिनमें 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 13 मंत्रालयों की प्रस्तुतियां शामिल हैं। असम का टेराकोटा शिल्प, राजस्थान की उस्ता कला और ओडिशा की 'मिट्टी से सिलिकॉन तक' की यात्रा भारत की जड़ों और भविष्य को दर्शाएगी। केरल की 'वॉटर मेट्रो' और उत्तर प्रदेश की बुंदेलखंड संस्कृति विकास की नई कहानी कहेंगे। मंत्रालयों की झांकियों में नई शिक्षा नीति, आयुष और आपदा प्रबंधन के साथ-साथ 'ऑपरेशन सिंदूर' पर आधारित एक विशेष झांकी भी आकर्षण का केंद्र होगी।
2. सैन्य शक्ति का नया स्वरूप: 'बैटल ऐरे फॉर्मेशन'
इस बार की परेड में सामरिक बदलाव देखने को मिलेगा। पहली बार 'फेज्ड बैटल ऐरे फॉर्मेशन' का उपयोग किया जाएगा, जिसमें सेना के वाहन और टुकड़ियाँ युद्ध के वास्तविक क्रम (जैसे पहले टोही दल, फिर मुख्य हमलावर यूनिट्स) में मार्च करेंगी। इन्फैंट्री और स्पेशल फोर्स के बीच की कड़ी मानी जाने वाली 'भैरवी लाइट कमांडो बटालियन' पहली बार अपना शौर्य दिखाएगी। आकाश, ब्रह्मोस, धनुष और अटैग्स (ATAGS) जैसे मेड-इन-इंडिया हथियार भारत की आत्मनिर्भरता का प्रमाण देंगे। आसमान में राफेल, सुखोई-30 और अपाचे जैसे घातक विमान अपनी गर्जना से दुश्मनों के हौसले पस्त करेंगे।
3. 'वीवीआईपी' कल्चर का अंत: नदियों और वाद्य यंत्रों को सम्मान
सरकार ने इस बार एक सराहनीय बदलाव किया है। अब दर्शक दीर्घा (Enclosures) को 'VVIP' जैसे औपनिवेशिक शब्दों के बजाय गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी पवित्र नदियों के नाम दिए गए हैं। इसी तरह, 'बीटिंग रिट्रीट' समारोह के दौरान भी दर्शक दीर्घाओं के नाम भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम पर होंगे, जो हमारी जड़ों से जुड़ाव को दर्शाते हैं।

4. अंतरराष्ट्रीय मेहमान और श्रद्धांजलि
इस गौरवशाली अवसर पर यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। पूरा कर्तव्य पथ बंकिम चंद्र चटर्जी की अमर रचना 'वंदे मातरम्' के सम्मान में फूलों और ऐतिहासिक पेंटिंग्स से सजाया जाएगा।


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