मुस्लिम बेगम के सपने से शुरू हुई ये परंपरा! बड़े मंगल की अनसुनी कहानी

ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले मंगलवारों को “बड़ा मंगल” कहा जाता है, और इनका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान हनुमान जी की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस वर्ष बड़ा मंगल और भी खास माना जा रहा है, क्योंकि लगभग 19 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब चार के बजाय आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं।

बड़े मंगल का महत्व और कथाएं

पहली मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ मास के किसी मंगलवार को भगवान राम और हनुमान जी का मिलन हुआ था। कहा जाता है कि जब राम जी माता सीता की खोज में भटक रहे थे, तभी उनकी मुलाकात हनुमान जी से हुई। यह घटना मंगलवार के दिन हुई थी, इसलिए इस दिन को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

दूसरी कथा के अनुसार, इसी महीने के एक मंगलवार को हनुमान जी को अमर होने का वरदान प्राप्त हुआ था। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जिस दिन उन्हें चिरंजीवी होने का आशीर्वाद मिला, वह दिन भी ज्येष्ठ मास का मंगलवार था। इस वजह से भी बड़े मंगल का महत्व बढ़ जाता है।

तीसरी कथा का संबंध वाजिद अली शाह के समय से जुड़ा है। कहा जाता है कि उनकी बेगम हनुमान जी की श्रद्धालु थीं। एक बार उन्हें स्वप्न में हनुमान जी के दर्शन हुए, जिसके बाद उन्होंने अलीगंज हनुमान मंदिर का निर्माण करवाया। कुछ समय बाद जब शहर में भयंकर महामारी फैली, तो उन्होंने इसी मंदिर में जाकर प्रार्थना की। जिस दिन उन्होंने पूजा की, वह ज्येष्ठ मास का बड़ा मंगल था। उसी अवसर पर पहली बार भंडारे का आयोजन किया गया, और तभी से लखनऊ में बड़े मंगल पर भंडारे और धार्मिक कार्यक्रमों की परंपरा चली आ रही है।

इस प्रकार, बड़ा मंगल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आस्था, सेवा और परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है।

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