अंधविश्वास के जाल में फंसा अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज...

बांका जिले के चांदन प्रखंड अंतर्गत बिरनिया पंचायत के पहाड़पुर गांव आजादी के 7 दशक बाद भी समस्याओं के मकड़जाल से बाहर नहीं निकल पा रही है,  यहां की 90 फीसदी आबादी आज भी गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, और अंधविश्वास जैसी समस्याओं में फंसकर सात दशक से आंसू बहा रही है.

चांदन प्रखंड मुख्यालय के पश्चिम क्षेत्र में अवस्थित बिरनिया पंचायत के पहाड़पुर गांव गौरीपुर पंचायत के भलुआही, दुधवा आदिवासी गांव आज तक कच्ची सड़क की भी नसीब नहीं है. पहाड़पुर गांव के बीचो बीच गांव की दूषित निकासी पानी हमेशा जमा हुआ रहता है.

अंधविश्वास का जाल 

जिससे घर के आस-पास हमेशा दूषित वातावरण रहता है,  यहां के लोग हमेशा किसी न किसी कारण से बीमार ग्रस्त रहते हैं,  एंबुलेंस आने की कोई सुविधा नहीं है. बीमार रहने पर झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करवाना इनकी मजबूरी बन गई है. गांव में सड़क नहीं रहने के कारण गांव का विकास अवरुद्ध हो गया है.

गावों के लोग आज भी आदिम युग के लोगों की तरह जीने को विवश हैं। पहाड़पुर गांव में किसी तरह टूटी फूटी कच्ची सड़क है। लेकिन गांव से बाहर निकलने के लिए खिरहरतर बांध के नीचे  नदी रहने के कारण बरसात के दिनों में लोगों को गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, चुनाव के वक्त विधायक हो या सांसद सबों ने वोट लेने के वक्त कई वादे करते हैं समय-समय पर गांव से मुख्य मार्ग तक जोड़ने के लिए अधिकारियों को बुलाकर नापी भी करवा देते हैं। और प्रलोभन देकर इन गांव वासियों से वोट ले जाते हैं। जीतने के बाद इन गांवों से मुंह फेर लेते हैं। आखिर में बांक गांव निवासी राय जी की जमीन बताकर विवाद ग्रस्त होने की संभावना को समझा-बुझाकर चले जाते हैं .

जबकि यह जमीन लोगों का कहना है कि बिहार सरकार की जमीन है। पहाड़पुर गांव में खेती भगवान भरोसे होती है। वर्षा नहीं होने पर इस पंचायत में सुखाड़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस गांव में सबसे बड़ी समस्या तब उत्पन्न हो जाती है जब नई नवेली दुल्हन, या शादी के लिए बारातियों को गांव तक लाना पड़ता है। कुछ तो लड़के लड़कियां की शादियां सड़क के अभाव में रिश्ता टूट जाती है। उस समय हम तमाम लोग अपने क्षेत्र के विधायक, सांसद को कोसते हैं और कहते हैं हे भगवान या खुदा किस उल्फत में फंस कर ऐसे विधायक सांसद को चुन लिया जिन्होंने मेरे गांव पहाड़पुर से मुंह फेर लिया.

बिरनिया पंचायत के कैसे मुखिया को चुन लिया, जिसने 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव तक आने के लिए सड़क नहीं होने की चर्चा नहीं की।जिसने पंचायत समिति बैठक में एक बार भी पहाड़पुर गांव से मुख्य मार्ग तक जोड़ने का रास्ता का प्रस्ताव नहीं ले सका है। लेकिन इस बार पंचायती चुनाव में हम ग्रामीण बारीकी से सोच समझकर वोट देंगे। जिन्होंने चुनाव जीतने के बाद पहला प्रस्ताव पहाड़पुर गांव मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए प्रस्ताव पास करेगा। और पहाड़पुर गांव का भविष्य उत्थान के लिए कार्य करेगा.

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