सबसे बड़े सियासी सूबे में सबसे छोटी भारत जोड़ो यात्रा ?

भारत जोड़ो यात्रा का यूपी में दूसरा दिन

लोग पूछ रहे हैं सवाल कि यूपी में क्यों फींका है अंदाज

क्या सीएम योगी से बच रहे है काग्रेंस के जाबांज

80 सीटों वाले यूपी में महज 120 किमी यात्रा से क्या संदेश देंगे राहुल गांधी?

 

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा देश के सबसे बड़े राजनीतिक सूबे उत्तर प्रदेश में पहुंच चुकी है... 80 लोकसभा सीटों वाले इस राज्य में राहुल की यात्रा महज ढाई दिन ही रहेगी.. राहुल 130 किमी चलेंगे और 3 लोकसभा सीट, 11 विधानसभा सीटों को कवर करेंगे... ये वो सीटें हैं, जहां कांग्रेस का पिछले दो विधानसभा चुनावों  में खाता तक नहीं खुला है...इसीलिए सवाल उठता है कि आखिर कि 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल विपक्ष का चेहरा कैसे बन पाएंगे? कांग्रेस सबसे बड़े सूबे में अपनी जड़ मजबूत किए बिना भाजपा को चुनौती कैसे दे पाएगी?

UP में आज 'भारत जोड़ो यात्रा' का दूसरा दिन रहा ... सुबह 6.15 बजे राहुल-प्रियंका के साथ यात्रा बागपत के मवी कलां से शुरू हुई. सबसे पहले तिरंगा फहराने के साथ राष्ट्रगान फिर आतिशबाजी हुई. बुधवार को रालोद कार्यकर्ता यात्रा में शामिल हुए. यूपी में यह पहला राजनीतिक दल है तो ऑफिशियल तौर पर यात्रा में शामिल हुआ. 48 किलोमीटर की यह यात्रा शामली के एलम में नाइट स्टे करेगी. यह कस्बा पलायन के लिए चर्चित रहे कैराना से 15 किमी दूर है. कल यानी 5 जनवरी को सुबह यात्रा कैराना से होकर गुजरेगी.. वेस्ट यूपी के जाटलैंड में राहुल गांधी क्या संदेश देंगे, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी. हालांकि 80 लोकसभा सीटों वाले यूपी में राहुल गांधी की पदयात्रा महज 120 किलोमीटर की ही रहेगी औऱ इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं.

राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि दक्षिण भारत से उत्तर भारत में 3100 किलोमीटर की 110 दिनों से ज्यादा की ये पदयात्रा हो चुकी है, लेकिन 25 करोड़ की आबादी वाले यूपी में महज दो दिनों की पदयात्रा के बाद राहुल गांधी का ये अभियान हरियाणा में प्रवेश कर जाएगा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यूपी की राजनीतिक अहमियत को नजरअंदाज कर मिशन 2024 के पहले राहुल गांधी का ये जोखिम कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचा सकता है.

राहुल गांधी स्वयं अमेठी से 2019 का लोकसभा चुनाव हार चुके हैं औऱ वायनाड में उन्हें जीत नसीब हुई. रायबरेली एकमात्र सीट कांग्रेस के पास है, लेकिन क्या कांग्रेस 2024 में ये सीट भी बचा पाएगी, ये बड़ी चुनौती है. रायबरेली में सोनिया गांधी लंबे समय से नहीं गई हैं औऱ उनकी राजनीतिक सक्रियता भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस प्रकार गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने स्वीट सरेंडर किया था, वही जोखिम लोकसभा चुनाव 2024 के पहले कांग्रेस लेने की स्थिति में है. केरल को छोड़ दें तो कांग्रेस अब दक्षिण भारतीय राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में भी उतनी मजबूत नहीं रही, जितना कि उसे होना चाहिए. क्या इससे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के मुकाबले बीजेपी से सीधे मुकाबला करने की कांग्रेस की कोशिशों को झटका नहीं लगेगा.

कांग्रेस के समक्ष चुनौती यह है कि  उसके पास यूपी में कोई दमदार चेहरा नहीं है, जिसे आगे करके वो पीएम मोदी के बाद बीजेपी में सबसे लोकप्रिय चेहरा बनकर उभरे योगी आदित्यनाथ का मुकाबला कर पाए. अजय सिंह लल्लू के बाद बृजलाल खाबरी के सामने भी खुद को साबित करने की चुनौती है. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के चेहरे को आगे कर यूपी महिला वोटरों को अपने पाले में लाने और बीजेपी की बुलडोजर पॉलिटिक्स का विकल्प देने की कोशिश की थी. लेकिन उसमें भी वो कामयाब नहीं रही और एक सीट पर सिमट गई.

यूपी भारत जोड़ो यात्रा रूट का बस हिस्सा लगता है. इसलिए वह यूपी को कवर कर रहे हैं. राहुल दिल्ली से हरियाणा सीधे भी निकल सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया. उन्होंने यूपी को टच किया है. भारत जोड़ो यात्रा का रूट कन्याकुमारी से श्रीनगर है, इसलिए बीच में जो राज्य आ रहे हैं, वहां वह जा रहे हैं.लगता है कि वह संदेश देने के लिए भी यूपी को कवर रहे हैं, ताकि ऐसा भी न हो कि इतना बड़ा राज्य उनसे छूट गया.

देखा जाए तो जिस प्रदेश में सबसे ज्यादा 80 सीटें हैं और कांग्रेस जहां सबसे कमजोर है, वहां राहुल सिर्फ 130 किमी चल रहे हैं, ऐसे में राहुल गाँधी को समझना चाहिए कि उन्हें 2024 में विकल्प बनना है तो उत्तर प्रदेश पर सबसे ज्यादा फोकस करना होगा, क्योंकि दिल्ली की सत्ता का रास्ता UP से ही निकलता है...फिलहाल UP में कांग्रेस इतिहास में सबसे ज्यादा कमजोर है..  यहां तक कि कांग्रेस का यूपी की 100 सदस्यीय उच्च सदन विधान परिषद में भी एक सदस्य नहीं बचा है.. ऐसा पहली बार हुआ है..हालांकि राहुल गांधी ने अपना सियासी जनाधार बढ़ाने की कवायद जरूर की... लेकिन वो भी कारगर तभी साबित होगी जब सही रणनीति बनाएंगे

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