ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से निकृष्ट दर्जे का निर्माण, तीन साल से बंद पड़ा काम
गडचिरोली : सिरोंचा तहसील के अतीदुर्गम आदिवासी क्षेत्र सोमनपल्ली-कोपेला मार्ग का सड़क निर्माण कार्य पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा होने के कारण ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई है। करीब 8 किलोमीटर लंबे इस सड़क निर्माण कार्य के लिए शासन द्वारा लगभग 10 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, लेकिन अब तक केवल 5 किलोमीटर सड़क का ही निर्माण पूरा हो पाया है। शेष 3 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा होने से क्षेत्र के हजारों आदिवासी नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य कर रही A R Construction कंपनी तथा संबंधित ठेकेदार की लापरवाही के कारण सड़क का काम वर्षों से अधूरा पड़ा है। वहीं सार्वजनिक बांधकाम विभाग (PWD) के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते निकृष्ट दर्जे का निर्माण कार्य किया गया और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।
यह सड़क क्षेत्र के कई अंदरूनी गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। सड़क निर्माण पूरा होने से ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद थी, लेकिन वर्षों से अधूरी सड़क ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। कच्चे रास्तों में कीचड़ भर जाने से वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने तथा दैनिक आवागमन के लिए ग्रामीणों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है। कई गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से लगभग टूट जाता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ महीनों तक काम चलता रहा, लेकिन बाद में कार्य पूरी तरह बंद कर दिया गया। कई स्थानों पर बनाई गई सड़क भी उखड़ने लगी है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय-समय पर विभागीय निरीक्षण किया जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
आदिवासी नागरिकों ने निर्माण कार्य कर रही A R Construction कंपनी को तत्काल ब्लैकलिस्ट करने तथा संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही अंदरूनी आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे आदिवासी समाज में शासन और प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “नोट फॉर वोट” की राजनीति के कारण आदिवासी क्षेत्र आज भी विकास से कोसों दूर हैं। करोड़ों रुपये मंजूर होने के बावजूद सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अधूरा रहना भ्रष्ट व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं किया गया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो आदिवासी जनता सड़क पर उतरकर तीव्र आंदोलन करेगी।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम

No Previous Comments found.