विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान की झारखंड इकाई द्वारा ऑनलाइन आभासी गोष्ठी आयोजित
विष्णुगढ़ : विश्व हिन्दी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) की झारखंड प्रदेश राज्य इकाई के तत्वावधान में शुक्रवार को एक ऑनलाइन आभासी गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन झारखंड प्रदेश प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चतुर्वेदी के नेतृत्व में किया गया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य झारखंड के सांस्कृतिक उत्सवों में साहित्य के योगदान को परंपरा से आधुनिकता के संदर्भ में प्रस्तुत करना रहा। इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि झारखंड प्रदेश प्रभारी बनने के बाद यह उनका पहला कार्यक्रम है। उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से झारखंड की सांस्कृतिक हिंदी साहित्य परंपरा तथा विलुप्त होती लोक परंपराओं को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने झारखंड के पारंपरिक त्योहारों एवं सांस्कृतिक उत्सवों पर प्रकाश डालते हुए आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की।कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जिन्दर सिंह मुण्डा (रांची) ने की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. घनश्याम चौरिया (रामगढ़) उपस्थित रहे। वक्ताओं में डॉ. बीरेंद्र कुमार चौरसिया (हजारीबाग) शामिल रहे। सरस्वती वंदना आशीष कुमार (हजारीबाग) ने प्रस्तुत की। स्वागत भाषण आकांक्षा कुमारी (हजारीबाग) ने दिया तथा आभार ज्ञापन डॉ. कुमारी स्वर्णा मिश्रा (गिरिडीह) ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रजनी शर्मा ‘चंदा’ (रांची) ने किया। संस्था के सचिव डॉ० गोकुलेश्वर द्विवेदी ने झारखंड राज्य इकाई की यह पहली आभासी के लिए शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वीरेंद्र चौरसिया कर शामिल रहे। उपस्थित रहने वालों में झारखंड राज्य से अधिक से अधिक विद्वतजनों की उपस्थिति रही।
रिपोर्टर : संदीप मिश्रा

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