Holika Dahan 2026: होली 4 मार्च को, लेकिन होलिका दहन क्यों 2 मार्च को? जानें सही मुहूर्त
मार्च 2026 में मनाया जाने वाला होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि नकारात्मकता के अंत और सकारात्मकता की शुरुआत का प्रतीक है। प्रतिवर्ष फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका की अग्नि जलाई जाती है, जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा और असुर शक्ति के विनाश की याद दिलाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अग्नि की पूजा करने से घर के दोष और बीमारियां दूर होती हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे ‘संवत्सर दहन’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है पुराने समय के कष्टों को जलाकर नए उत्साह का स्वागत करना।

होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त 2 मार्च को शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक है। इस वर्ष प्रदोष काल में होलिका दहन उदय पूर्णिमा के बिना संपन्न होगा, और भद्रा का प्रारंभ देर रात से होने के कारण शाम के समय किया गया पूजन पूरी तरह दोषमुक्त रहेगा। पूजा के दौरान मन में सहजता रखें और अपनी नकारात्मकताओं की आहुति दें। विधिपूर्वक किया गया यह कार्य परिवार में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग खोलता है।
![]()
होलिका दहन की पूजा सरल है। सबसे पहले स्वयं को शुद्ध करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। पूजन सामग्री में रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे और कलावा शामिल करें। होलिका पर जल अर्पित करें और कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार परिक्रमा करते हुए घुमाएं। इसके बाद बाकी सामग्री और नई फसल के प्रतीक को अग्नि में समर्पित करें।होलिका की अग्नि जलाने का धार्मिक महत्व जितना प्रबल है, इसका वैज्ञानिक आधार भी महत्वपूर्ण है। यह अग्नि बुराई के दहन का प्रतीक है और ऋतु परिवर्तन के समय वातावरण को शुद्ध करती है। सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन पर उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म जीव और हानिकारक तत्व अग्नि की गर्मी से नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा, अग्नि के दर्शन और परिक्रमा से मानसिक तनाव कम होता है और स्पष्टता बढ़ती है।
![]()
इस प्रकार, होलिका दहन 2026 न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि घर और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने और जीवन में शांति और समृद्धि लाने का मार्ग भी है।

No Previous Comments found.