बजट ने तोड़ा मिडिल क्लास का सपना! सस्ते घरों पर फिरा पानी, निवेशकों की चांदी

केंद्रीय बजट 2026-27 से सस्ते और किफायती घरों के क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। लंबे समय से सुस्ती झेल रहे इस सेगमेंट के लिए न तो कोई नई योजना घोषित की गई और न ही ब्याज या टैक्स से जुड़ी कोई ठोस मदद सामने आई। इससे मिडिल क्लास खरीदारों और रियल एस्टेट डेवलपर्स दोनों में निराशा देखने को मिली है।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना काल के बाद से किफायती घरों की मांग में लगातार गिरावट आई है। पहले जहां कुल हाउसिंग बिक्री में इनकी बड़ी हिस्सेदारी होती थी, अब वह सिमटती जा रही है। जानकारों का मानना है कि अगर सरकार ब्याज सब्सिडी या किफायती घरों की परिभाषा में बदलाव जैसे कदम उठाती, तो बाजार को नई जान मिल सकती थी।

हालांकि, बजट पूरी तरह नकारात्मक भी नहीं रहा। सरकारी कंपनियों की जमीन और इमारतों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल में लाने के लिए रीट्स (REITs) बनाने के प्रस्ताव ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। रेलवे, बंदरगाह, बिजली और टेलीकॉम जैसी बड़ी सरकारी संपत्तियों को इस ढांचे में लाने से बाजार में पूंजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर फोकस से भविष्य में आवास और वेयरहाउसिंग की मांग को सहारा मिल सकता है। कुल मिलाकर, बजट ने जहां किफायती घरों के सपने को फिलहाल अधूरा छोड़ा है, वहीं निवेश के नए रास्ते खोलने की कोशिश जरूर की है।

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