बचपन को मिला नया आशियाना: इटावा में बाल श्रम के चंगुल से मुक्त हुए तीन मासूम, अधिकारियों और टीमों के संयुक्त प्रयासों से जगी नई उम्मीद
इटावा : जिंदगी की जिस उम्र में हाथों में किताबें और खेलने के लिए खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में ढाबों और होटलों की भागदौड़ में पिस रहे तीन किशोरों को आखिरकार बाल श्रम के दलदल से मुक्ति मिल गई है। जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के बाद मंगलवार को जसवंतनगर क्षेत्र में आगरा-हाईवे पर स्थित ढाबों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर चलाए गए एक विशेष संयुक्त अभियान के दौरान इन मासूमों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मुक्त कराए गए बच्चों में एक किशोर बाराबंकी और दो किशोर कन्नौज जनपद के रहने वाले हैं।
संवेदनशीलता और मुस्तैदी से शुरू हुई पुनर्वास प्रक्रिया
सहायक श्रमायुक्त कुलदीप सिंह के कुशल संयोजन और श्रम प्रवर्तन अधिकारी अतुल श्रीवास्तव के नेतृत्व में इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर न केवल बच्चों को मुक्त कराया, बल्कि उनका आवश्यक विवरण दर्ज कर उन्हें नियमानुसार संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए संबंधित विभागों के सुपुर्द कर दिया ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। अधिकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि बच्चों का बचपन, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य उनका मौलिक अधिकार है और बाल श्रम एक गंभीर व दंडनीय अपराध है।
इन अधिकारियों और टीमों की सक्रियता से सफल हुआ अभियान
इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण अभियान को जमीन पर उतारने में श्रम प्रवर्तन अधिकारी अतुल श्रीवास्तव, सहायक श्रमायुक्त कुलदीप सिंह, वरिष्ठ सहायक प्रवीन कुमार, बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रेम कुमार शाक्य, एएचटीयू प्रभारी एसआई रफीक अहमद, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से बिलाल अहमद तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) से पीएलवी लालमन एवं राजेंद्र सिंह की टीम ने अपनी अहम भूमिका निभाई।
श्रम विभाग और तमाम सहयोगी संस्थाओं ने होटल, ढाबा एवं अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों से पुरजोर अपील की है कि वे भूलकर भी किसी नाबालिग से काम न कराएं। प्रशासन की यह टीम लगातार समाज को यह संदेश दे रही है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना हम सबका सामूहिक कर्तव्य है।
जागरूक बनें, बचपन बचाएं: यदि आपके आस-पास भी कहीं बाल श्रम जैसी अमानवीय प्रथा नजर आए, तो चुप न रहें। तुरंत श्रम विभाग, पुलिस या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें, ताकि किसी मासूम का भविष्य अंधकार में जाने से बचाया जा सके।
रिपोर्टर : देवेन्द्र सिंह
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