आरोप -वित्त एवं लेखाधिकारी पर दबाव बनाने हेतु शिक्षकों को विद्यालय से बुलाकर धरना-प्रदर्शन में किया जा रहा सम्मिलित
झांसी : वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) पर नियम-विरुद्ध दबाव बनाने हेतु शिक्षकों को विद्यालय से समय पूर्व बुलाकर धरना-प्रदर्शन/क्रमिक अनशन में सम्मिलित किए जाने के विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ ही जिलाधिकारी, मण्डलीय सहायक निदेशक, (बेसिक शिक्षा) व वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा विभाग को भी अवगत कराते हुए कार्यवाही की मांग की गयी है।
जिलाध्यक्ष नितिन चौरसिया के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में विभागीय नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किए जा रहे कार्यों को प्रभावित करने तथा नियम-विरुद्ध कार्य कराने के उद्देश्य से वित्त एवं लेखाधिकारी पर दबाव बनाने हेतु एक शिक्षक संगठन द्वारा धरना-प्रदर्शन में सम्मिलित होने के लिए बामौर, गुरसरांय, मऊरानीपुर एवं मोंठ जैसे दूरस्थ विकास खंडों के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को भी बुलाया जा रहा है।वर्तमान वर्षाकालीन परिस्थितियों में आंतरिक ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों से लगभग 80 से 100 किलोमीटर की दूरी तय कर कोई शिक्षक मात्र एक घंटे के भीतर वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय झाँसी में उपस्थित हो जाए, यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है ।
उक्त परिस्थितियों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि धरना-प्रदर्शन/क्रमिक अनशन में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए उन्हें विद्यालय निर्धारित समय पूर्ण होने से पूर्व ही छोड़ने हेतु प्रेरित अथवा प्रोत्साहित किया जा रहा है। यदि शिक्षक विद्यालयीय समय में विद्यालय छोड़कर धरना-प्रदर्शन/क्रमिक अनशन में सम्मिलित होने के लिए निकल पड़ते हैं तो इससे विद्यालयों में संचालित पठन-पाठन कार्य प्रभावित होना तथा छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। किसी वित्तीय अथवा विभागीय प्रकरण के संबंध में यदि किसी शिक्षक अथवा संगठन को कोई आपत्ति है तो उसके निराकरण के लिए सक्षम अधिकारी के समक्ष नियमानुसार प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। किसी बाहरी दबाव अथवा धरना-प्रदर्शन के माध्यम से नियमों के विपरीत निर्णय अथवा भुगतान कराने का प्रयास विभागीय कार्यप्रणाली की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती है।
ज्ञापन में यह अनुरोध किया गया है कि प्रकरण की गंभीरता एवं छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक हितों को दृष्टिगत रखते हुए यह सुनिश्चित कराया जाए कि किसी भी शिक्षक को विद्यालयीय समय में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के विद्यालय छोड़ने अथवा किसी धरना-प्रदर्शन/क्रमिक अनशन में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित न किया जाए।
साथ ही, वित्त एवं लेखाधिकारी पर नियम-विरुद्ध दबाव बनाए जाने की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि किसी व्यक्ति द्वारा शिक्षकों को उनके विद्यालयीय दायित्व से हटाकर इस प्रकार के धरना-प्रदर्शन/क्रमिक अनशन में सम्मिलित कराने अथवा अधिकारी पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास किया गया है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
No Previous Comments found.