इस्कॉन झाँसी में श्रील प्रभुपाद आविर्भाव दिवस एवं व्यास पूजा समारोह का भव्य आयोजन

झाँसी। इस्कॉन झाँसी में 5 सितंबर को इस्कॉन के संस्थापकाचार्य एवं विश्वभर में कृष्ण भक्ति के प्रचार-प्रसार के महान आचार्य श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी के 130वें आविर्भाव दिवस एवं व्यास पूजा समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष का यह उत्सव इस्कॉन की स्थापना के 60वें वर्ष के विशेष अवसर के साथ मनाया गया। संयोगवश श्रील प्रभुपाद जी का आविर्भाव दिवस शिक्षक दिवस के दिन होने के कारण भक्तों ने उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में विशेष रूप से स्मरण एवं glorify किया। भक्तों ने बताया कि श्रील प्रभुपाद ऐसे महान शिक्षक थे, जिन्होंने अमेरिका जैसे देश में भी अनेक सामान्य एवं भौतिक जीवन में उलझे युवाओं को कृष्ण भक्ति से जोड़कर श्रेष्ठ भक्त एवं समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनाया; उन्होंने अपनी शिक्षाओं और पुस्तकों के माध्यम से भक्ति का एक प्रकार का पूर्ण क्रैश कोर्स संसार को प्रदान किया, जिसमें साधना, दर्शन, जीवन-शैली एवं भगवान से संबंध स्थापित करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया को समझाया गया। उन्होंने मानव जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक किसी विषय को अधूरा नहीं छोड़ा और भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत आदि शास्त्रों के गूढ़ सिद्धांतों को अत्यंत सरल, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक भाषा में प्रस्तुत किया। उनकी कक्षा का प्रत्येक विद्यार्थी वास्तव में ‘टॉपर’ है, क्योंकि उनके शिष्य आज भी भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को घर-घर पहुँचाने एवं श्रीचैतन्य महाप्रभु की संकीर्तन आंदोलन की सेवा में लगे हुए हैं; स्वयं भगवद्गीता के 18वें अध्याय के 68वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने संदेश का प्रचार करने वाले भक्त को अत्यंत प्रिय बताया है। व्यास पूजा के अवसर पर भक्तों ने श्रील प्रभुपाद जी के चरणों में अपने भावपूर्ण पुष्प, प्रार्थनाएँ एवं व्यक्तिगत सेवाएँ अर्पित कीं। कार्यक्रम में श्री चितचोर प्रभु एवं वृंदावन से आए उनकी टीम द्वारा वैष्णव भजनों की मधुर प्रस्तुति हुई, जिसके पश्चात श्रील प्रभुपाद जी का महाभिषेक, पुष्पांजलि एवं आरती की गई। इस पावन अवसर पर इस्कॉन झाँसी द्वारा लगभग 5,000 भक्तों, श्रद्धालुओं एवं दानदाताओं के लिए महाभंडारे का आयोजन भी किया गया। श्रील प्रभुपाद जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से उनके द्वारा लिखित पुस्तकों पर विशेष छूट भी प्रदान की गई, ताकि अधिक से अधिक लोग उनके साहित्य का अध्ययन कर कृष्णभावनामृत के संदेश से लाभान्वित हो सकें। समारोह के साथ ही इस वर्ष के श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का भी भावपूर्ण समापन हुआ। चूँकि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य मध्यरात्रि में हुआ था, उस समय समस्त व्रजवासी उत्सव नहीं मना सके; इसलिए अगले दिन नंद बाबा द्वारा श्रीकृष्ण के जन्म की प्रसन्नता में मनाया गया उत्सव नंदोत्सव कहलाता है। इसी भाव को जीवंत करते हुए कार्यक्रम के समापन पर ब्रज भूमि दास एवं श्री चितचोर दास के नेतृत्व में नंदोत्सव के पारंपरिक गीत एवं भजन गाए गए, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने अत्यंत उत्साह एवं आनंद के साथ सहभागिता की। इस प्रकार श्रील प्रभुपाद जी के आविर्भाव दिवस, व्यास पूजा एवं नंदोत्सव का यह समारोह भक्ति, कृतज्ञता, गुरु-शिष्य परंपरा और श्रीकृष्ण के संदेश के प्रचार के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।  सुरेंद्र राय, पीयूष रावत ,महेश सर्राफ, राजीव अग्रवाल, अशोक सेठ, अजय अग्रवाल, अन्योर दास, रमेश राय, मनीष नीखरा एवं आई.के पांडे, ललित मोहन दास ब्रज भूमि दास, व्रज जन रंजन दास, प्रिय गोविन्द दास, श्याम विलास दास, महेश्वर चन्द्र दास, दामोदर बंधु दास एवं भक्त विपिन ! इस अवसर पर पियूष रावत जी ने सभी पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।

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