खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर में कड़े सुरक्षा इंतजाम, लाल चौक सील, स्कूल–कॉलेज बंद घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
ईरान में शिया समुदाय के प्रमुख नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारत के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर जम्मू और कश्मीर में पड़ा है, जहां शिया समुदाय के व्यापक प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।
स्कूल–कॉलेज बंद, परीक्षाएं स्थगित
कश्मीर घाटी में बढ़ते प्रदर्शनों के चलते प्रशासन ने सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए हैं, जबकि चल रही परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया गया है। श्रीनगर के प्रमुख इलाके लाल चौक को पूरी तरह सील कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियां
शिया समुदाय के बड़े प्रदर्शनों को देखते हुए सड़कों पर भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। लाल चौक तक पहुंचने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं और शिया बहुल इलाकों में सुरक्षा की मल्टी-लेयर व्यवस्था लागू की गई है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं, जबकि मोबाइल इंटरनेट की स्पीड भी फिलहाल कम रखी गई है।
पुलिस के साथ सेना भी तैनात
रविवार को ईरान में खामेनेई की इजरायली हमले में मौत के बाद श्रीनगर समेत कश्मीर के कई इलाकों में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए, जो सोमवार को भी जारी रहे। हालात को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाते हुए सड़कों पर पुलिस के साथ सेना की भी तैनाती कर दी है। शहर के प्रमुख चौराहों पर बैरिकेडिंग और तार लगाए गए हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोका जा सके। घाटी के अन्य जिलों में भी शिया बहुल क्षेत्रों में इसी तरह की पाबंदियां लागू हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
घटना के बाद कश्मीर घाटी के कई बड़े नेताओं ने इजरायली हमले की निंदा की है। अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने हड़ताल का आह्वान किया, जिसका समर्थन जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती ने किया। हालात को देखते हुए शिक्षा मंत्री ने सभी शैक्षणिक संस्थानों में दो दिन की छुट्टी की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री की अपील
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईरान में हो रहे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताते हुए सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार, ईरान में मौजूद प्रदेश के निवासियों और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय के संपर्क में है।

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