खरमास समाप्त: अब विवाह और शुभ कार्यों का शुभ समय शुरू

हिंदू पंचांग में खरमास को एक ऐसा समय माना जाता है जिसमें विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में सूर्य देव की स्थिति विशेष मानी जाती है, जिसके कारण शुभ कार्यों को टालने की परंपरा रही है।

खरमास की समाप्ति के बाद अब एक बार फिर से शुभ कार्यों की शुरुआत हो गई है। जैसे ही यह अवधि खत्म होती है, विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए नए शुभ मुहूर्त सक्रिय हो जाते हैं और लोगों में विवाह की तैयारियों को लेकर उत्साह बढ़ जाता है।

विवाह के लिए फिर से शुरू हुआ शुभ समय

खरमास समाप्त होने के बाद अब पंचांग के अनुसार विवाह के लिए अनुकूल समय फिर से उपलब्ध हो गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस समय ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अधिक शुभ मानी जाती है, जिससे वैवाहिक जीवन में सुख और स्थिरता की कामना की जाती है।

इसी कारण जिन परिवारों ने खरमास के चलते अपनी शादी की तारीखें रोक रखी थीं, वे अब नए मुहूर्त देखकर विवाह की तैयारियों में जुट गए हैं।

बाजारों में लौटी रौनक

खरमास खत्म होते ही शादी-ब्याह से जुड़ी गतिविधियाँ तेज हो जाती हैं।
विवाह स्थल, कैटरिंग, सजावट, बैंड-बाजा और फोटोग्राफी जैसी सेवाओं की मांग बढ़ने लगती है।
इस समय बाजारों में रौनक लौट आती है और शादी के सीजन का माहौल बनने लगता है।

धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

हिंदू परंपरा के अनुसार खरमास के दौरान सूर्य देव धनु या मीन राशि में रहते हैं, जिसे मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। लेकिन जैसे ही यह अवधि समाप्त होती है, शुभ कार्यों की शुरुआत करना उचित माना जाता है।

इस समय को नए आरंभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

खरमास के समाप्त होने के साथ ही अब विवाह और अन्य शुभ कार्यों का समय शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में कई विवाह समारोहों की धूम देखने को मिलेगी और परिवारों में खुशी का माहौल रहेगा। यह समय नए रिश्तों की शुरुआत और जीवन में मंगल अवसरों का प्रतीक है।

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