#Life_saved: मास्क पहनते समय न करें ये गलतियां, आ सकती है तीसरी लहर

कोरोना काल में सबसे ज्यादा फोकस हमेशा से मास्क पर किया गया है और ऐसा माना गया है कि कोरोना काल में मास्क ही कोरोना से जंग का सबसे बड़ा हथियार है. लेकिन कोरोना के प्रकोप के बीच और अब कोरोना के हल्के होने पर लोगों ने मास्क का ना तो सही से यूज किया है और ना ही ये समझ पाए है कि मास्क कौन सा लगाएं , कैसे लगाएं ,,,और वाकई में मास्क आपको किस हद तक कोरोना से बचा सकता है . भले ही हम वैक्सीन लगवा रहे हैं, लेकिन वायरस से सुरक्षित रहने का जो अभ्यास है, उसे हमें नहीं छोड़ना चाहिए, और संक्रमित होने से बचने के लिए मास्क जरूर पहनना चाहिए.मास्क के महत्व को देखते हुए, हमें मास्क को लेकर खुद को शिक्षित करना जरूरी है। जैसे मास्क के प्रकार कितने हैं और सार्वजनिक स्थानों पर किस तरह से मास्क पहनना चाहिए।  

कपड़े के मास्क 

कपड़े के मास्क वोवेन या नॉन वोवेन नेचुरल सिंथेटिक मटेरियल की परतों से बनाए जाते हैं. ये फेस मास्क ड्रॉपलेट स्प्रे को 8 फीट से घटाकर 2.5 इंच कर सकते हैं, जिससे आपके द्वारा हवा में छोड़े जाने वाले संभावित वायरस युक्त कणों की मात्रा कम हो जाती है. होममेड क्लॉथ फेस मास्क की प्रभावशीलता काफी हद तक इसके डिजाइन पर निर्भर करती है. घने वोवेन वाले कॉटन के कपड़े जैसे कि क्विल्टिंग कॉटन सबसे अच्छा होता है। वहीं, सिंगल-लेयर क्लॉथ मास्क डबल या ट्रिपल लेयर मास्क की तुलना में कम प्रभावी होता है। 

सर्जिकल मास्क 

इस तरह के फेस मास्क का निर्माण पहनने वालों को प्रदूषण से बचाने के लिए नहीं किया गया था, बल्कि रोगियों को घाव के संक्रमण से बचाने के लिए किया गया था, जो किसी सर्जन या फ्रंटलाइन वर्कर्स के सांस छोड़ने के कारण हो सकता है। बदलते समय के साथ अब इसे स्वास्थ्य हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स द्वारा सुरक्षात्मक उपायों के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है।ये सपाट, पतले, कागज जैसे मास्क आमतौर पर सफेद और हल्के नीले रंग के होते हैं, जिन्हें एक से अधिक बार नहीं पहनना चाहिए। सर्जिकल फेस मास्क लगभग 60% सांस के कणों को फिल्टर कर सकते हैं, लेकिन ये थोड़े ढीले होते हैं और पूर्ण सुरक्षा प्रदान नहीं करते। ये मास्क मुख्य रूप से ड्रॉपलेट्स और स्प्रे को रोकने के लिए बनाए गए हैं। 

FFP2S / N95 मास्क 

FFP2S / N95 जिसे रेस्पिरेटर भी कहा जाता है, पहनने वाले की नाक और मुंह के चारों ओर एक तंग सील बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह 95% से अधिक 0.3 माइक्रोन पार्टिकल्स को फिल्टर कर देता है। यह मुख्य रूप से इनहेलिंग पार्टिकुलेट मैटर से सुरक्षा प्रदान करता है, जो मास्क के किनारों से अपना रास्ता खोज सकते हैं। इस प्रकार रेस्पिरेटर्स पहनने वाले और उसके आसपास खड़े व्यक्ति दोनों की रक्षा होती है। रेस्पिरेटर्स में मौजूद कई परतों के बीच इसकी बाहरी परतों की संरचना और डिजाइन इसे ड्रॉप्लेट्स को रोकने में मदद करती है (जिनमें से कुछ संक्रामक हो सकते हैं)। जबकि इसकी आंतरिक परतें नमी और पसीने को रोकती हैं, इसलिए इसे पहनने में आराम मिलता है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (NIOSH) के एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि 

• एक सर्जिकल मास्क ने 59% रेस्पिरेटरी एरोसोल को रोका है
• जबकि तीन लेयर वाला कॉटन मास्क ने 51% एरोसोल को रोका है
• और N95 मास्क ने 95% तक एरोसोल को रोका है

FFP2S / N95 यानी रेस्पिरेटर्स के फायदों के बारे में जानने के बाद हमें रेस्पिरेटर्स के उपयोग के सही तरीके के बारे में भी पता होना चाहिए। मास्क समझदारी और सावधानी के साथ पहना जाना चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि नाक और मुंह सही से ढका हो और कोई गैप्स न हो। वैसे इंटरनेट पर अत्यधिक डेटा और अनुशंसाओं ने भी भ्रम पैदा कर दिया है कि यदि आप N95 मास्क पहन रहे हैं तो क्या एक अतिरिक्त लेयर की जरूरत है? इस प्रश्न का उत्तर है 'नहीं'। अगर आप FFP2 या N-95 मास्क पहन रहे हैं, तो डबल मास्किंग से बचना चाहिए। इसके बजाय आप मल्टी लेयर N-95 मास्क ले सकते हैं 

इसके अलावा, मास्क पहनने से पहले और इसे हटाने के बाद हाथ की स्वच्छता का पूरा ध्यान दें। हमेशा दिए गए निर्देशों के अनुसार जिम्मेदारी के साथ इसे डिस्पोज करें। हमें इस बात से अवगत होना चाहिए कि मास्क न केवल एक निवारक फेशियल रेस्पिरेटर के रूप में कार्य करता है, बल्कि यह स्वस्थ जीवन शैली की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहलू भी बन गया है।

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