हर संकट का समाधान है महामृत्युंजय मंत्र: सोमवार के जप से मिलते हैं ये अद्भुत लाभ
सनातन परंपरा में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना गया है। सोमवार का दिन विशेष रूप से भगवान भगवान शिव की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई उपासना से शिव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

महादेव को महाकाल स्वरूप में भी पूजा जाता है। जो भक्त श्रद्धा से उनकी आराधना करता है, वह भय और रोग से मुक्त जीवन की कामना करता है। सोमवार के दिन शिव के प्रिय और अत्यंत प्रभावशाली महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष फलदायी माना गया है। यह मंत्र आध्यात्मिक शक्ति और संरक्षण प्रदान करने वाला माना जाता है।
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
मंत्र का भावार्थ
इस मंत्र में त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की उपासना की जाती है, जो समस्त जगत का पालन-पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ फल सहज ही डाली से अलग हो जाता है, वैसे ही मनुष्य भी जन्म-मृत्यु के बंधन और कष्टों से मुक्त हो जाए यही इस मंत्र की प्रार्थना है।
महामृत्युंजय मंत्र जप के प्रमुख लाभ
- सोमवार के दिन इसका जप करने से शिव जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- सवा लाख (1,25,000) बार जप करना अकाल मृत्यु के भय को दूर करने में सहायक माना गया है।
- 1100 बार जप करने से मानसिक और बाहरी भय से राहत मिलती है।
- 11,000 बार जप करने से रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ की कामना की जाती है।
- श्रद्धा और विश्वास के साथ जप करने पर संतान सुख की प्राप्ति का भी आशीर्वाद माना जाता है।


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