प्रियंका-मायावती भी हिंदुत्व के रंग में दिख रहीं...क्या जीत पाएंगे उत्तर प्रदेश?

उत्तर प्रदेश में चार महीने के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सत्ताधारी बीजेपी और विपक्ष के बीच घमासान जारी है. पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी ने सूबे में हिंदुत्व का ऐसा सियासी एजेंडा सेट किया है जिसका विपक्षी दलों के पास न तो कोई काट दिख रहा है और न रणनीति.ऐसे में तमाम विपक्षी दल बीजेपी के हिंदुत्व के हथियार की धार को कुंद करने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व का सहारा लेते दिखाई दे रहे हैं.इसी कड़ी में लगातार विपक्षी दाल तमाम तरह के आयोजन भी कर रहे हैं और हिन्दू वोटों को अपनी और आकर्षित करते नजर आ रहे हैं.. तो आइये जानते है इस खास कैसे विपक्षी दलों ने सॉफ्ट हिंदुत्व का सहारा लेकर जनता के दिलो में अपनी जगह बनाने की होड़ शुरू कर दी हैं  ....

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां सभी पार्टियां जोर-शोर से कर रही हैं। इस बार सभी पार्टियों में जो एक बात कॉमन सी दिख रही है, वह है सॉफ्ट हिंदुत्व। अभी तक खुद को सेक्युलर सेक्युलर बताने वाले प्रमुख दलों के मुखिया भी राम-कृष्ण की बात कर रहे...ऐसे में विपक्षी दलों के तमाम नेता आज वही पैंतरे आजमाते दिखते हैं.... जिनके लिए वे कभी बीजेपी को निशाना बनाया करते थे.  प्रियंका गांधी का त्रिपुंड और दुर्गा स्तुतिकांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने रविवार को वाराणसी में मिशन-2022 का आगाज किया. ...

एयरपोर्ट से उतरकर सीधे प्रियंका काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन किया. उन्होंने दुर्गाकुंड स्थित कुष्मांडा देवी के मंदिर में भी जाकर आराधना की. प्रियंका गांधी माथे पर त्रिपुंड, कलाई में तुलसी की माला, रुद्राक्ष और मौली (लाल रंग का रक्षासूत्र) बांधे हाथों में तलवार लिए काशी की रैली में नजर आईं. ये पहली बार नहीं है जब प्रियंका गांधी हिंदुत्व के रंग में नजर आई हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी प्रियंका कई मंदिरों में पूजन-अर्चन करती नजर आईं थी.

वही मायावती का भी अयोध्या-मथुरा-काशी में आस्था देखने को मिला जहाँ संस्थापक कांशीराम के 15वें परिनिर्वाण दिवस पर मायावती ने अपने चुनावी मुद्दे गिनाए. इस दौरान मायावती ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर भी काशी, मथुरा और अयोध्या में कराए जा रहे विकास कार्य को रोका नहीं जाएगा. लखनऊ में बसपा के ब्राह्मण सम्मेलन के समापन पर मायावती का मंच पूरी तरह हिंदुत्व की रंग में रंगा नजर आया. ब्राह्मण शंख बजे रहे थे, मंत्रोच्चार हो रहा था और मायावती हाथों में त्रिशूल था . इस दौरान मायावती के हाथो में भगवान गणेश की प्रतिमा भी नजर आईं. मायावती का रणनीति साफ है. हिंदुत्व की हवा में बहकर बीजेपी के पक्ष में जा रहे अधिक से अधिक वोटों को हाथी के पक्ष में मोड़ने  तैयाई कर रही है  मंदिर-मंदिर घूम रहीं हैं ....

दूसरी तरफ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी यूपी में मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और पूजा अर्चना करते नजर आ रहे हैं. माघ मेले में संगम में सपा प्रमुख ने डुबकी लगाई. हनुमान मंदिर में माथा टेका तो चित्रकूट में भरतकूप में स्नान करने के बाद मंदिर में पूजा अर्चना की. मिर्जापुर पहुंचे तो मां विंध्यवासिनी के दर्शन कर पूजा अर्चना की और काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर में माथा टेका. अखिलेश यादव आयोध्या में राममंदिर निर्माण होने के बाद पूरे परिवार के साथ जाकर रामलला का दर्शन करने का ऐलान कर चुके हैं.

बीजेपी के हिंदुत्व की सवारी कर सबसे आगे निकल जाने के बाद यूपी के सभी विपक्षी दल यह समझ गए हैं कि अगर उन्हें ध्रुवीकरण की राजनीति से बचना है तो मुस्लिम समर्थक दल होने की छवि से बाहर निकलना होगा. यूपी में 2022 चुनाव में बीजेपी सूबे की तीनों धार्मिक नगरी खासकर अयोध्या को चुनावी मुद्दा जरूर बनाएगी. इसीलिए अयोध्या सभी सियासी दलों के चुनावी एजेंडे में शामिल है, जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भव्य राममंदिर का निर्माण हो रहा है. बीजेपी यह बताने की कोशिश कर रही है कि उसी के प्रयासों के चलते आज अयोध्या में राममंदिर का सपना साकार हो रहा है. दूसरी ओर विपक्षी दल अयोध्या से चुनावी अभियान का आगाज कर यह बता रहे हैं कि अब यह उनका भी एजेंडा है.

सॉफ्ट हिंदुत्व के फॉर्मूले को कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव में आजमाया था और सत्ता के वनवास को खत्म करने में पार्टी कामयाब रही थी. इसका उदाहरण ममता-केजरीवाल की सफलता में देखने को मिला जिसमे पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी ने हिंदुत्व के एजेंडे में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. विपक्ष बहुत हद तक ममता का वहीँ विनिंग फॉर्मूला अपनाने की जुगत में दिखाई दे रहा है. हालांकि उसे ममता जैसी सफलता मिलेगा या नहीं ये चुनावी नतीजों से साफ होगा.

यूपी की सियासत में आस्था की पॉलिटिक्स हमेशा से हावी रही है. बीजेपी सूबे में मतदाताओं को ये संदेश देती रही हैं की उसे छोड़कर अन्य राजनीतिक पार्टियां हिंदू देवी-देवताओं का सम्मान नहीं करती हैं. यही वजह है कि तमाम विपक्षी पार्टियां बीजेपी के हार्ड हिंदुत्व से मुकाबला करने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व की सियासी लकीर खींच रही हैं. और हर प्रयास में जुटी है की वो भी हिन्दुओं को अपने पाले में कर सके, इसके लिए आस्था की सभी नगरी को विपक्ष अपनी पहली प्रथिमकता में रख रही है...लेकिन अब देखना ये होंगा सॉफ्ट हिंदुत्व की सियासत कर विपक्ष को सफलता मिलती है या नहीं ये आने वाले विधानसभा चुनाव में ही पता चलेगा  ...

 

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