पहलगाम नरसंहार की पहली बरसी: लहू का हिसाब और ऑपरेशन सिंदूर की पूरी गाथा

आज तारीख है 22 अप्रैल 2026......ठीक एक साल पहले, इसी तारीख को कश्मीर की हसीन वादियों में मौत का ऐसा तांडव हुआ था जिसने पूरे हिंदुस्तान की रूह को कंपा दिया था। पहलगाम की वो बैसरन घाटी, जिसे दुनिया छोटा स्विट्जरलैंड कहती है, वहां मजहब पूछ-पूछकर 26 बेगुनाह पर्यटकों को गोलियों से भून दिया गया था। चीखें पहाड़ियों से टकरा रही थीं और पूरा देश गुस्से से उबल रहा था। लेकिन याद रखिएगा, ये नया भारत है! घर में घुसकर मारना भी जानता है और हिसाब बराबर करना भी। आज हम आपको बताएंगे उस काले दिन की पूरी कहानी और कैसे भारतीय जांबाजों ने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के जरिए उन दरिंदों को जहन्नुम के रास्ते पहुंचाया। लहू का हिसाब कैसे लिया गया, आज एक-एक जानकारी आपके सामने होगी!

आपको बता दें बीते साल आज ही के दिन पहलगाम की बैसरन घाटी में सैलानी कुदरत की खूबसूरती निहार रहे थे, तभी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट ने सन्नाटा चीर दिया। लश्कर-ए-तैयबा के कायर आतंकियों ने पर्यटकों को घेरा, उनका धर्म पूछा और फिर शुरू हुआ मौत का घिनौना खेल। इस हमले में 26 मासूमों ने अपनी जान गंवा दी। पूरा देश सन्न था, लेकिन दिल्ली के गलियारों में एक बड़ा फैसला लिया जा चुका था कि न्याय होगा, और बहुत जल्द होगा। जहां हमले के तुरंत बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया। 6 और 7 मई की दरमियानी रात को भारतीय जांबाजों ने सरहद पार पाकिस्तान स्थित 9 से ज्यादा आतंकी ठिकानों को मिट्टी में मिला दिया। यह आतंकियों के आकाओं को पहला कड़ा संदेश था। 

वहीं पाकिस्तान पर चोट करने के बाद असली चुनौती थी उन तीन हत्यारों को ढूंढना जो घाटी के जंगलों में छिप गए थे। इंटेलिजेंस ब्यूरो और सेना ने एक महीने तक पैदल घूमकर, शून्य से नीचे के तापमान में सिग्नल कैप्चर करने वाले उपकरणों के जरिए जाल बुना। जहां 22 जुलाई 2025 को श्रीनगर के बाहरी इलाके हरवान के पास 'लिदवास' के घने जंगल की सटीक लोकेशन मिली । CRPF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना की 4 पैरा ने मोर्चा संभाला। 28 जुलाई की सुबह तक तीनों आतंकी लश्कर कमांडर सुलेमान, हमजा अफगानी और जिब्रान ढेर कर दिए गए। सुलेमान वही मास्टरमाइंड था जिसने पहलगाम और गगनगीर हमलों की साजिश रची थी। फॉरेंसिक जांच में उनकी राइफलों से निकले कारतूस पहलगाम के खाली खोखों से मैच कर गए। सबूत साफ था कि गुनाहगारों का अंत हो चुका था।

वहीं आज हमले की पहली बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर शहीदों को नमन किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा। आतंकियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।" वहीं भारतीय सेना ने भी ग्राफिक्स जारी कर दुनिया को बता दिया कि "न्याय जरूर मिलेगा। 
लेकिन आपको बता दें हमले के एक साल बाद कश्मीर की तस्वीर बदली है, लेकिन जख्म अब भी हरे हैं। जी हां अप्रैल 2025 के उस हमले के बाद कश्मीर का पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ। वो होटल जो कभी फुल रहते थे, उनकी कमाई आज गिरकर 30 से 35 प्रतिशत पर सिमट गई है। यानी 65-70 फीसदी की भारी गिरावट। वहीं गिरावट के बावजूद 2025 के पहले छह महीनों में 95 लाख से ज्यादा घरेलू और करीब 19 हजार विदेशी पर्यटक कश्मीर पहुंचे।
आंकड़ों के अनुसार, साल 2000 से अब तक सुरक्षाबलों ने 13,435 आतंकियों को ढेर किया है। अकेले 2025 में जून तक 46 आतंकी मारे जा चुके थे।

देखा जाए तो पहलगाम की उन पहाड़ियों में आज भी उन 26 मासूमों की यादें बसी हैं, जिनके सपने गोलियों से छलनी कर दिए गए थे। लेकिन आज भारत का सीना गर्व से चौड़ा है क्योंकि हमने अपने नागरिकों के खून की एक-एक बूंद का हिसाब कर लिया है। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक मिशन नहीं था, यह उन आतंकियों के लिए कफन था जिन्होंने भारत की संप्रभुता को चुनौती दी थी। कश्मीर आज भी खड़ा है, सैलानियों का इंतजार कर रहा है, और हमारी सेना आज भी मुस्तैद है, ताकि कोई और सुलेमान या हमजा फिर कभी किसी मासूम की तरफ आंख उठाकर न देख सके। याद रखिएगा, जो भारत को दर्द देगा, उसे मिटना ही होगा। 

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