स्टेट बैंक सलेहा का लचर रवैया जनता कर रही परेशानियों का सामना
पन्ना : इन दिनों भारतीय स्टेट बैंक सलेहा में क्राउड का माहौल बना हुआ है पहले तो नगद कैश की तंगी भी सुनने में आई थी परंतु इन दिनो उमड़ती भीड़ ने सोचने पर विवश कर दिया है लगभग 100 गांवों के बीच केवल एक ही शाखा होने के कारण भी भीड़ का होना लाजमी है शाखा प्रबंधक से मौखिक बात करने पर पता चला कि स्टाफ की कमी होने के कारण कई कार्य पेंडिग हो जा रहे है जबकि हम रात को आठ आठ बजे तक भी काम कर रहे हैं विषय विचारणीय यह है कि स्टाफ की कमी के कारण जनता के काम रुक रहे हैं अतिथियों पत्रकारों एवं समाजसेवी नागरिकों जो जनता के कार्यों से संबंधित चर्चाएं बैंक प्रबंधन से कर सकें और समस्याओं को सुलझाने में बैंक प्रबंधन की मदद कर सके तो न उनके लिए बैठ कर बाते कर पाने की सुविधा मिल पा रही है और न पानी की वहीं शाखा प्रबंधक का रवैया भी रूढ़ता की ओर इशारे कर रहा है इस बारे में जब शाखा प्रबंधक से बात की गई तो उनके द्वारा वही स्टाफ की कमी का हवाला दिया गया इससे तो यह सिद्ध होता है कि बैंक में चपरासी भी अब बैंकिंग संबंधी कार्य कर रहे हैं जबकि बैंक जैसे संस्थान में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अलावा किसी भी व्यक्ति से बैंकिंग संबंधी कार्य कराना जोखिम भरा हो सकता है और स्टाफ की कमी से क्षेत्र की गति में भी व्यवधान पैदा हो रहा है स्टेट बैंक की उच्चस्तरीय प्रबंधन को चाहिए कि बैंक में स्टाफ की कमी को पूर्ण कराया जाय।
कियोस्क खातों के लिए बनाए गए नियम भी न जन हितार्थ हैं और न संवेदनशील
जन चर्चाएं यह है कि ज्यादातर ऐसे बुजुर्ग महिला एवं पुरुष जिनकी उम्र हो जाने के कारण कियोस्क संचालक फिंगर प्रिंट को स्कैन नहीं कर पाते उन बुजुर्गों महिलाओं एवं पुरुषों के खातों के लेन देन भी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है ऐसे में सरकार द्वारा भेजे गए पेंशन और अन्य पैसे का दुरुपयोग तो हो ही रहा है साथ ही बुजुर्ग महिला एवं पुरुषों को बैंक के चक्कर भी काटने के लिए विवश होना पड़ता है ऐसे में कियोस्क खाता धारक बुजुर्गों महिलाओं एवं पुरुषों को सलेहा बैंक प्रबंधन द्वारा निर्धारित किसी एक दिन को ही बैंक से पैसा प्राप्त हो सकता है जो कि शायद सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है अगर किसी को इमरजेंसी है तो वह अपने ही खाते के पैसे को प्राप्त नहीं कर पा रहा है जबकि अगर बात की जाए तो सलेहा में मंगलवार के दिन बाजार का दिन होता है इस दिन को ही ज्यादातर गरीब और बुजुर्गों महिलाओं एवं पुरुषों को अपने लिए किराना एवं अन्य चीजों को बाजार से खरीदने में पैसे की जरूरत होती है ऐसे में यह सलेहा बैंक प्रबंधन द्वारा निर्धारित बाजार के बाद का दिन तानाशाही पूर्ण भी दिखाई दे रहा है बैंक के उच्च स्तरीय प्रबंधन से करबद्ध निवेदन है कि इस मामले की जांच कर तुरंत कार्यवाही करे वरना जनता को मजबूरन लोकतांत्रिक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
निर्धारित जगह पर ही बैठे कियोस्क
भारतीय स्टेट बैंक के कियोस्क शाखाएं मनमाने तरीके से बैंक के इर्द गिर्द ही दिखाई दे रहे हैं कुछेक को तो पता नहीं किन नियमों के तहत जगह परिवर्तन कर दिया गया है जबकि शुरुआती दौर पर उनकी जगह कुछ ओर थी जिससे जनता को और ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है कुछ मामलों में तो जनता को उनके नजदीक ही बैंकिंग सेवाएं मिल रही थी परंतु नवागत शाखा प्रबंधक की मेहरबानी से कियोस्क शाखाओं के स्थान परिवर्तन करने पर महिलाएं बुर्जुग मजदूर भटकने के लिए बेबस हो रहे हैं और नवागत प्रबंधक अपनी सुविधानुसार कियोस्क शाखाओं का संचालन करा रहे हैं अगर गहन जांच हो जाए तो ग्रामीणों को हो रही परेशानी का अंदाजा शायद वातानुकूलित कुर्सी पर बैठे जिम्मेदारों भी लग सकता है।
आउट सोर्स कर्मियों का होना चाहिए पुलिस वेरिफिकेशन
चूंकि बैंक एक अति संवेदनशील संस्था है जिसका संबंध सीधे तौर पर सरकारी सुविधाओं को धरातल पर जन हितार्थ पहुंचाने का सीधा माध्यम भी है इसलिए बैंक जैसी जगह पर कार्यरत आउट सोर्स कर्मियों एवं कियोस्क संचालकों का पुलिस वेरिफिकेशन भी समय समय पर किया जाना चाहिए ताकि जनता के बीच बैंक ओर सरकार के प्रति पारदर्शिता बनी रहे ओर धोखाधड़ी जैसे मामले जो आजकल हो रहे हैं कहीं न कहीं उनको बहुत हद तक रोकने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्टर : रफ़ी सिद्दीकी

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