70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर भारत में भी रोक की तैयारी
दुनिया के सबसे विवादित खरपतवारनाशकों (Herbicides) में शामिल पैराक्वाट डाइक्लोराइड को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित इस रसायन के इस्तेमाल पर भारत में भी पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, लंबे समय से इसकी बिक्री और कृषि क्षेत्र में उपयोग जारी रहा है।
केंद्र सरकार ने जारी किया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध लगाने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें इसके उत्पादन, आयात, परिवहन, वितरण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। मंत्रालय की ओर से जारी ‘पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर रोक का आदेश, 2026’ का ड्राफ्ट 13 जुलाई को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया।
इंसानों और जानवरों की सेहत को खतरे को देखते हुए फैसला
सरकार ने यह कदम पैराक्वाट डाइक्लोराइड के जहरीले प्रभावों को देखते हुए उठाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके संपर्क में आने से इंसानों और जानवरों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी वजह से दुनिया के कई देशों ने पहले ही इस रसायन पर प्रतिबंध लगा दिया है।
क्या है पैराक्वाट डाइक्लोराइड?
पैराक्वाट डाइक्लोराइड एक शक्तिशाली खरपतवारनाशक है, जिसका इस्तेमाल खेतों में अनचाहे पौधों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता रहा है। इसकी विषाक्तता को लेकर कई देशों में लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। भारत में भी इसका उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जाता रहा है।
कीटनाशक अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने कीटनाशक अधिनियम, 1968 की धारा 27 के तहत पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। यदि यह आदेश अंतिम रूप लेता है, तो भारत उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां इस रसायन पर प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण लागू हैं।
पहले भी उठती रही है प्रतिबंध की मांग
पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर रोक लगाने की मांग पहले भी कई बार उठ चुकी है। कुछ राज्यों ने इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कानूनी चुनौतियों और अन्य तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ा।
देशभर में लागू होगा नया नियम
प्रस्तावित आदेश राज्य स्तर के प्रतिबंधों से अलग होगा और पूरे देश में लागू किया जा सकेगा। नियम लागू होने के बाद इस रसायन के उत्पादन और वितरण का लाइसेंस रखने वालों को अपना स्टॉक सरकार को सौंपने के लिए तीन महीने का समय दिया जा सकता है।
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