परिवार की तरह अपने पशुओं का भी करवाएं बीमा

किसी अनहोनी की संभावना को ध्यान में रखते हुए हम खुद का, अपने परिवार का, अपने घर, गाड़ी और सामान की बीमा  करवाते हैं. लेकिन खेती-किसानी का आधार माने जाने वाले पशुधन के बीमा के बारे में सोचते तक नहीं हैं.लेकिन बीमारी, मौसम या दुर्घटना से होने वाली पशु की मौत से एक किसान को बहुत ज्यादा नुकसान होता है. क्योंकि आजकल पशुधन भी लगातार महंगा होता जा रहा है. अच्छी मात्रा में दूध देने वाली गाय-भेंस भी लाख रुपये से ज्यादा की आती है. अगर घोड़ा, ऊंट की बात की जाए तो इनकी कीमत कई लाख की होती है. इसलिए जरूरी है कि अन्य सामान की तरह भी पशुधन का बीमा कराया जाए. राज्य सरकार पशुओं के बीमा के लिए समय-समय पर अलग-अलग योजनाएं निकालती हैं. खास बात ये है कि पशुओं के बीमा के प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा केंद्र या राज्य सरकारें वहन करती हैं.

कैसे करवाएं पशुओं का बीमा

•    जो किसान भाई अपने पशु का बीमा करवाना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने नजदीकी पशु अस्पताल में बीमा की जानकारी देनी होगी
•    उसके बाद पशुचिकित्सक और बीमा एजेंट किसान के घर आकर पशु के स्वास्थ्य की जांच करेंगे
•    जांच होने के बाद पशु चिकित्सक एक स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करता है
•    बीमा एजेंट जांच होने के बाद पशु के कान में एक टैग लगाता जिससे पता चलता है की पशु का बीमा हो चुका है
•    उसके बाद किसान और पशु की एक साथ फोटो ली जाती है

कुदरती आपदा जैसे-

बाढ़, चक्रवात, अकाल, भूकंप समेत किसी कुदरती कहर के कारण पशु की मौत होने पर.किसी बीमारी या फिर बीमार के उपचार के लिए किए जा रहे ऑपरेशन के दौरान पशु की मौत होने पर.हड़ताल, दंगा, नागरिक अभियान जोखिम या किसी आतंकवादी वारदात में पशु की मौत होने पर.

 

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