PM मोदी-पाशिनयान की अहम मुलाकात, रक्षा और अर्थव्यवस्था पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किर्गिस्तान दौरे का दूसरा दिन कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने दोपहर करीब 2 बजे अपने आर्मेनियाई समकक्ष निकोल पाशिनयान से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस बैठक की जानकारी दी। शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO समिट से इतर हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

बैठक के दौरान भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मा, विज्ञान एवं तकनीक, संस्कृति और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति भी चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल रही।

वहीं बदलते वैश्विक और भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और आर्मेनिया के बीच यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। मध्य एशिया और यूरेशिया में बदलती परिस्थितियों के बीच भारत लगातार इस क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम की शुरुआत बिश्केक में महात्मा गांधी स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करके की। इसके बाद उनका किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ द्विपक्षीय बैठक का कार्यक्रम है।

भारत और किर्गिस्तान के संबंध लंबे समय से मैत्रीपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संपर्क के साथ रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्र में भी सहयोग जारी है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति सदिर जापारोव की बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के अलावा मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर भी सभी की नजरें हैं। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, शाम करीब 6 बजे दोनों नेताओं की बैठक होनी है। भारत-रूस संबंधों के लिहाज से इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और रूस के संबंध रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, व्यापार, निवेश, परमाणु सहयोग और रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों के प्रमुख स्तंभ हैं। ऐसे में पीएम मोदी और पुतिन की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी का किर्गिस्तान दौरा भारत की मध्य एशिया नीति और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच उसकी कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाता है। आर्मेनिया, किर्गिस्तान और रूस के नेताओं के साथ होने वाली बातचीत पर भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं के लिहाज से खास नजर रहेगी।

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