ब्राह्मण के सहारे यूपी की सियासत

कहते है दिल्ली की सियासत का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है और उत्तर प्रदेश में सियासी पकड़ बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण ब्राह्मण वोट बैंक अहम भूमिका अदा करता है। उत्तर प्रदेश में करीब 11 से 14 फ़ीसदी ब्राह्मण वोट हैं । जो लखनऊ में सरकार बनाने मेंबड़ी भूमिका निभाता हैं, कहते जिस ओर ब्राह्मण वर्ग रुख़ करता है मानो सत्ता उसे ही कुर्सी का इशारा कर रही होती है । सूबे के 21 मुख्यमंत्रियों में से 6 मुख्यमंत्री यूपी में ब्राह्मण रहे हैं। जिसमें तीन बार तो अकेले नारायण दत्त तिवारी ने ही कमान संभाली फिलहाल मोदी मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश से केवल महेंद्र नाथ पांडेय ही ब्राह्मण कैबिनेट में चेहरा थे हाल ही में हुए विस्तार में अजय मिश्रा टेनी को मंत्रिमंडल में शामिल कर गृह राज्य मंत्री बनाया गया है , वैसे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में बनी पहली केंद्र सरकार में सात ब्राह्मण मंत्री थे, जो कि उस मंत्रिमंडल का 30 फीसदी था। वही एक बार फिर उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2022 की तैयारियां को लेकर सभी पार्टियों सियासत जंग शुरू कर दी है .... उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नारा चल रहा है – 2017 में राम लहर और 2022 में परशुराम लहर। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी इन दिनों यूपी में ब्राह्मणों को मनाने में लगी हैं। समाजवादी पार्टी ने भगवान परशुराम के नाम का सहारा लिया है तो अब बीएसपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपना ब्राह्मण कार्ड खेल दिया है। बीएसपी ने 23 जुलाई से यूपी के 18 मंडलों में ब्राह्मण सम्मेलन करने का ऐलान किया है। इन सम्मेलनों की ज़िम्मेदारी पार्टी ने महासचिव सतीशचन्द्र मिश्र को सौंपी है और शुरुआत होगी अयोध्या से। बीजेपी में अभी ब्राह्मण बनाम ठाकुर राजनीति का विवाद चल रहा है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने वाले हैं. लेकिन, अभी से सियासी गोटियां सेट की जा रही है. बहुजन समाज पार्टी को उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों की याद आई है तो दूसरी तरफ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के मुताबिक कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन के रास्ते खुले रखने का दावा भी किया है. दरअसल, विधानसभा चुनाव के पहले उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं के सुर बदलने लगे हैं. कल तक बहुजन समाज पर एकाधिकार का दावा करने वाली बीएसपी सुप्रीमो ने ब्राह्मणों के लिए बड़ी बात कही है. वो 23 जुलाई से ब्राह्मण सम्मेलन करने जा रही हैं.

उत्तर प्रदेश बीजेपी कोर कमेटी आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की समन्वय बैठक में शामिल हो रही है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ये बैठक जारी है. इस दौरान 2022 के यूपी विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संघ की तरफ से बीजेपी को अहम सुझाव दिए जा सकते हैं. इस बैठक में यूपी चुनाव का रोडमैप तैयार किया जा सकता है.

वही यूपी चुनाव से पहले मायावती का ब्राह्मण प्रेम जाग गया है. उन्होंने कहा कि यूपी में ब्राह्मण समाज दुखी है. एससी,एसटी वर्ग हमेशा बीएसपी के साथ रहा. बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणोंको लुभाने और सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है. देर से ही सही लेकिन बहन जी कुमारी मायावती भी यूपी के चुनावी मैदान में उतर गई है. चुनावी की तैयारियों का बिगुल फूंकने के साथ ही मायावती ने बीजेपी को हराने लिए और समाजवादी पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए नया दांव खेला है.

वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए 21 जुलाई को उन्नाव का दौरा करेंगे. अखिलेश यादव निषाद समुदाय के बड़े नेता रहे मनोहर लाल की 85वीं जयंती के कार्यक्रम में शामिल होंगे.

बीएसपी के ब्राह्मण सम्मेलन पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि यह सब करने से कुछ फायदा नहीं मिलेगा, आएगी तो बीजेपी ही. वहीं अखिलेश यादव के ओबीसी और निषाद वोट बैंक के दांव पर उन्होंने कहा कि पहले अखिलेश यादव बताएं कि अपनी सरकार में ओबीसी के लिए क्या किया? यह सब अखिलेश का चुनावी नाटक है  

वही अब जानकारों का कहना है... केवल ओबीसी और दलितवोट बैंक की सियासत दोनो क्षेत्रीय दलों के महागठबंधन पर भारी पड़ गई, उधर कड़ी चुनौती के बाद भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन कियाऔर कांग्रेस तो इस बार अमेठी भी न बचा पायी । अब एक बार फिर उत्तर प्रदेश में चुनाव आया है सभी सियासी दलों ने फिर अपनीमुखरता के प्रसिद्ध ब्राह्मण वर्ग को लुभाने की कोशिश शुरू कर दी , बसपा ने 23 जुलाई से ब्राह्मण सम्मेलन करने का एलान किया है तोसमाजवादी पार्टी ज़िलों ज़िलों में भगवान परशुराम की प्रतिमा लगाने का एलान कर रखा है ।

वहीं सत्ता से दशकों से दूर कांग्रेस को अभी भी पंडित नेहरू के परिवार का ही सहारा है , प्रियंका गांधी यूपी की प्रभारी है और कांग्रेस उन्हें के चेहरे से ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिशकर रही है वही भाजपा ने योगी सरकार के ख़िलाफ़ ब्राह्मण चेतना परिषद बना कर प्रदेश व्यापी अभियान चलाने वाले दिग्गज कांग्रेसीजितिन प्रसाद को ही तोड़ कर भाजपा में जोड़ लिया है अब वे योगी सरकारी नीतियों की तारीफ़ कर रहे है । चुनावों में अभी लगभग 6 महीने बाक़ी है ऐसे में उत्तर प्रदेश की सियासत में अभी कई नए नए मोड़ आने बाक़ी है वैसे ब्राह्मणों को जोड़ने की चौतरफ़ा कोशिश होरही है लेकिन सामाजिक रूप से सक्षम ब्राह्मण वर्ग को आज भी राष्ट्रीय मुद्दों जैसे आतंकवाद , देश की सुरक्षा , आर्थिक तरक़्क़ी , राष्ट्रवाद जैसे के साथ जुड़ने में सुकून मिलता है पर समाज आज रोज़गार और महंगाई की चुनौती से रूबरू है. ऐसे में देखना होगा कि चुनावों के दौरान सत्ता या विपक्ष में बैठे दल किन मुद्दों पर ज़ोर डाल कर उन्हें लुभाने की कोशिश करते है ।

 

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