Republic Day Special: मौत भी छीन न पाए वतन का प्यार , देशभक्ति के जज़्बे को जगा देंगी ये शायरियां
Republic Day 77th:जनवरी की सर्द हवा में जब तिरंगा शान से लहराता है, तो हर दिल में देशप्रेम की एक नई लहर दौड़ जाती है। यही एहसास गणतंत्र दिवस को खास बनाता है। 26 जनवरी केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि उस संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और आज़ादी की शक्ति का प्रतीक है, जिसने भारत को एक सशक्त राष्ट्र की पहचान दी।
इस दिन राजपथ पर होने वाली भव्य परेड, हमारे वीर सैनिकों का अदम्य साहस और देश की उपलब्धियों की झलक हर भारतीय के मन को गर्व से भर देती है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर देशभक्ति से भरी शायरी दिलों में एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है। लफ़्ज़ों में सजी वतन की मोहब्बत, शहीदों का बलिदान और तिरंगे की आन-बान-शान सब मिलकर दिल को सीधे छू जाने वाला एहसास पैदा करते हैं.....

- दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
- सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है
- हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
- सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसितां हमारा
- वतन की रेत ज़रा एड़ियां रगड़ने दे मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
- लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
- वतन के जां-निसार हैं वतन के काम आएंगे हम इस ज़मीं को एक रोज़ आसमां बनाएंगे
- दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो
- इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान अंधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान
- ज़मीं पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
- वतन की ख़ाक से मर कर भी हम को उन्स बाक़ी है मज़ा दामान-ए-मादर का है इस मिट्टी के दामन में
- उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आंखें
- नाक़ूस से ग़रज़ है न मतलब अज़ां से है मुझ को अगर है इश्क़ तो हिन्दोस्तां से है
- ये कह रही है इशारों में गर्दिश-ए-गर्दूं कि जल्द हम कोई सख़्त इंक़लाब देखेंगे
- वतन की पासबानी जान-ओ-ईमां से भी अफ़ज़ल है मैं अपने मुल्क की ख़ातिर कफ़न भी साथ रखता हूं
- ऐ अहल-ए-वतन शाम-ओ-सहर जागते रहना अग़्यार हैं आमादा-ए-शर जागते रहना
- कहां हैं आज वो शम-ए-वतन के परवाने बने हैं आज हक़ीक़त उन्हीं के अफ़्साने
- हम भी तिरे बेटे हैं ज़रा देख हमें भी ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से शिकायत नहीं करते


No Previous Comments found.