बधरा में अधूरा रास्ता बना 500 परिवारों की मुसीबत, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
रीवा - जिले के सेमरिया तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बधरा के परौहन टोला और गौतमान टोला में अधूरा पड़ा रास्ता ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। प्रधानमंत्री सड़क तक पहुंचने वाला मार्ग मुरुमीकरण के बाद भी पूरा नहीं हो सका,जिससे करीब 500 परिवारों की आवाजाही प्रभावित होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने अब इस समस्या को लेकर कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर संबंधित भूमि का सर्वे कराने और वैधानिक प्रक्रिया के तहत रास्ते का निर्माण पूरा कराने की मांग की है।
डेढ़ किलोमीटर का रास्ता अधूरा,ग्रामीणों की परेशानी बरकरार
ग्रामीणों के आवेदन के मुताबिक, प्रधानमंत्री सड़क से राजकिशोर द्विवेदी के घर तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे रास्ते पर मुरुमीकरण का कार्य कराया गया,लेकिन वेदांग पाण्डेय की भूमि के पास पहुंचकर निर्माण कार्य रुक गया। नतीजा यह है कि सड़क का लाभ ग्रामीणों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से पगडंडी के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि जब रास्ते का निर्माण शुरू हुआ, तो उसे पूरा कराने की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी?
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, फिर भी समाधान का इंतजार
अधूरे रास्ते का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। आवेदन में बताया गया है कि बच्चों को स्कूल और कोचिंग आने-जाने में परेशानी होती है। वहीं, अन्य ग्रामीणों को भी आवागमन के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। करीब 500 परिवारों से जुड़ी इस समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सुगम रास्ता उपलब्ध कराना जरूरी है,ताकि बच्चों की पढ़ाई और आम लोगों की आवाजाही बाधित न हो।
भूमि का सर्वे कराकर रास्ता निकालने की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित भूमि का विधिवत सर्वे कराया जाए और नियमानुसार भूमि अधिग्रहण अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर रास्ते की समस्या का निराकरण किया जाए। उनका उद्देश्य किसी की भूमि पर अवैध कब्जा करना नहीं, बल्कि नियमानुसार रास्ते की समस्या का समाधान कराना है, ताकि अधूरा निर्माण पूरा हो सके और ग्रामीणों को राहत मिल सके।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
आवेदन देने वालों में राजकिशोर द्विवेदी, रामनरेश गौतम, झल्ला आदिवासी सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और संबंधित भूमि का सर्वे कराकर रास्ते का निर्माण पूरा कराने के लिए क्या कदम उठाता है।फिलहाल ग्रामीणों को आश्वासन नहीं, बल्कि समस्या के स्थायी समाधान का इंतजार है।
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी
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