शीतला अष्टमी व्रत से जुड़ी 7 जरूरी बातें, जिन्हें हर भक्त को जानना चाहिए

सनातन धर्म में देवी शक्ति के अनेक स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन्हीं दिव्य रूपों में एक महत्वपूर्ण स्वरूप Sheetala Mata का भी है, जिन्हें आरोग्य और रोगों से मुक्ति देने वाली देवी माना जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला Sheetala Ashtami (बसौड़ा) का पर्व विशेष रूप से माता शीतला की पूजा और व्रत के लिए समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार साल 2026 में यह पावन व्रत 11 मार्च 2026, बुधवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन माता शीतला की श्रद्धा से पूजा करने पर भक्तों को रोगों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

1. शीतला अष्टमी का व्रत कब रखा जाता है?

शीतला माता की पूजा के लिए समर्पित यह व्रत हर साल होली के आठवें दिन रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 11 मार्च, बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन भक्त माता शीतला की विशेष पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं।

2. शीतला माता की पूजा क्यों की जाती है?

सनातन परंपरा में शीतला माता को आरोग्य प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से भक्तों को चेचक, खसरा जैसे रोगों से रक्षा मिलती है और जीवन में स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है।

3. माता की पूजा में लगाया जाता है बासी भोग

शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। माता को एक दिन पहले बनाया गया भोजन और पकवान भोग के रूप में अर्पित किया जाता है, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस दिन गर्म पानी से स्नान करने की भी परंपरा नहीं है।

4. शीतला माता के प्रमुख मंदिर

देश में शीतला माता के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। इनमें Sheetla Mata Temple, उत्तर प्रदेश के Kada Dham, और राजस्थान के Chaksu में स्थित शीतला माता मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

5. शीतला अष्टमी पर क्या न करें?

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चूल्हा जलाना, घर में झाड़ू लगाना या सुई में धागा डालना शुभ नहीं माना जाता। इसके अलावा माता शीतला की सवारी गधे को परेशान करना भी वर्जित माना गया है।

6. शीतला अष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार विधि-विधान से शीतला अष्टमी का व्रत रखने और माता की पूजा करने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद मिलता है। इससे व्यक्ति को स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

7. शीतला अष्टमी का आध्यात्मिक संदेश

मान्यता है कि शीतला माता अपने हाथों में झाड़ू और शीतल जल धारण करती हैं। यह प्रतीक हमें स्वच्छता, संतुलन और स्वास्थ्य के महत्व को समझाता है। यह पर्व साफ-सफाई और निरोग जीवन का संदेश देता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसकी प्रामाणिकता के लिए अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं।

 

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