योगी राज में अब सिर्फ अमीर बच्चों को मिलेगी शिक्षा?
आखिर क्यों नहीं मिल रहा 10 हजार गरीब बच्चों को दाखिला?
क्या गरीब बच्चों को शिक्षा पाने का अधिकार नहीं?
योगी सरकार में निजी स्कूल की मनमानी
गरीब बच्चों को नहीं दे रहे दाखिला...
जी हां ये सब हम नहीं कह रहे बल्कि योगी राज में शिक्षा का हाल बयां कर रहा है...जाहिर है हर गरीब बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल सके और वह बेहतर इंसान बन सके..इसके लिए सरकार ने निजी स्कूलों में भी शिक्षा के अधिकार का नियम लागू किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश में शिक्षा के अधिकार की निजी स्कूल खुलेआम धज्जिया उड़ा रहे हैं...और सरकार को मुंह चिढ़ाने का काम कर रहे हैं...आपको बता दें प्रदेश में शिक्षा अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा...जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है...खासकर गरीब बच्चों को...कहते हैं शिक्षा बच्चों को अधिकार होता है और वहीं अधिकार उनसे छीना जा रहा है..
आपको बता दें राजधानी लखनऊ के निजी स्कूल RTE यानी शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को प्रवेश देने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं...जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद अधिकतर विद्यालयों ने अभी तक दाखिले नहीं किए हैं...ऐसे में अभिभावक BSA कार्यालय और विद्यालयों के बीच दौड़ लगाने को मजबूर हैं...RTE के तहत गरीब बच्चों को प्राइवेट विद्यालयों में मिलने वाले 25% सीटों पर निशुल्क प्रवेश देने के आदेश को स्कूल नहीं मान रहे हैं..राजधानी लखनऊ में हाई प्रोफाइल विद्यालयों ने इस नियम को दरकिनार कर रखा हैं...15 दिन पहले जिला अधिकारी ने सभी विद्यालयों को फटकार लगाते हुए इन बच्चों को अपने विद्यालयों में प्रवेश देने के आदेश दिए थे...जिलाधिकारी की ओर से दिए गए समय सीमा बीतने के बाद भी अभी तक इन विद्यालयों की ओर से बच्चों को प्रवेश देने की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया है...जी हां ऐसे में अब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने में हो रही लापरवाही अब संबंधित स्कूलों पर भारी पड़ सकती है..जिला प्रशासन ने इस मामले में सख्ती बरतनी शुरू कर दी है...दरअसल, लखनऊ में लगभग 18,000 बच्चों को आरटीई के तहत स्कूल आवंटित किए गए थे, लेकिन अब तक केवल 8,000 बच्चों को ही प्रवेश मिल पाया है... शेष 10,000 बच्चों के भविष्य को लेकर डीएम विशाख जी अय्यर ने गंभीर रुख अपनाया है...शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश न देने वाले शहर के 80 निजी स्कूलों की NOC रद्द की जाएगी...इस संबंध में BSA की ओर से नाम सहित सभी स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है...
वहीं बैठक में डीएम अय्यर ने साफ तौर पर कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी...बैठक के दौरान यह जानकारी सामने आई कि 75 निजी स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने बच्चों के दाखिले को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई है..इस पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने नगर मजिस्ट्रेटों और खंड शिक्षा अधिकारियों की संयुक्त टीमें बनाकर इन स्कूलों की सघन निगरानी करने के निर्देश दिए हैं...ऐसे में अब इन निजी स्कूल पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना है...लेकिन चिंता की बात ये है कि जहां एक ओर प्रदेश में योगी सरकार बराबरी की बात करती है, गरीब को उसके अधिकार देने का दावा करती है, ऐसे में बच्चों के भविष्य के साथ क्यों इतना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है...बच्चों की शिक्षा में भेदभाव करना कितना सही है..सवाल है कि क्या अब शिक्षा भी अमीर गरीब देखकर दी जाएगी...सवाल तीखे जरुर हैं लेकिन योगी सरकार की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह जरूर हैं...

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