2027 की तैयारी में योगी का महाअभियान! 43 जिलों में दौरा, 36 हजार करोड़ का विकास कार्ड
यूपी विधानसभा चुनाव का औपचारिक ऐलान भले ही अभी दूर हो...लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए गियर बदल दिया है! ज़मीन से लेकर आसमान तक, पूर्वांचल से लेकर पश्चिमांचल तक...योगी आदित्यनाथ ने ऐसा तूफानी चक्रव्यूह रचा है कि विरोधी खेमे में खलबली मच गई है! सिर्फ तीन महीनों के भीतर 43 ज़िलों का तूफानी दौरा...और जनता की झोली में डाल दिए 36,877 करोड़ रुपये के महा-विकास प्रोजेक्ट्स! एक तरफ विकास की सौगात और दूसरी तरफ सपा-कांग्रेस पर तीखा प्रहार...
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 का रण जीतने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से एक्शन मोड में आ चुके हैं। चुनावी ढोल बजने से काफी पहले ही योगी ने सूबे का कोना-कोना नापना शुरू कर दिया है। उनका एकमात्र मकसद साफ है कि चुनाव की तारीखों का ऐलान होने से पहले ही विकास कार्यों की रफ्तार इतनी तेज़ कर देना कि विपक्ष के पास सवाल उठाने का कोई मौका ही न बचे! सीएम योगी ने ज़मीनी स्तर पर अपनी सक्रियता को इस कदर बढ़ाया है कि पिछले तीन महीनों के दौरान उन्होंने राज्य के 43 अलग-अलग जिलों में अपनी धमक दर्ज कराई है। इतना ही नहीं, सियासी रूप से बेहद अहम माने जाने वाले 7 जिलों में तो वे एक से ज्यादा बार पहुंचे और खुद विकास कार्यों का ऑन-द-स्पॉट जायजा लिया!
आपको बता दें जब नेता चुनाव से ठीक पहले वादों की झड़ी लगाते हैं, तब योगी आदित्यनाथ ज़मीन पर उतरकर अरबों रुपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं। पिछले 90 दिनों में सीएम योगी ने प्रदेश भर में कुल 36,877 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करके यूपी की बदलती तस्वीर जनता के सामने रख दी है। बाबा विश्वनाथ की नगरी और पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सीएम योगी ने सर्वाधिक 4 बार दौरा किया। देवरिया, बिजनौर, प्रयागराज, अयोध्या, कुशीनगर और गाज़ियाबाद, ये वो 6 ज़िले हैं जहाँ मुख्यमंत्री ने 3 महीनों में 2-2 बार तूफानी दौरे किए और कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंका। मई महीने की शुरुआत गोरखपुर, प्रयागराज और सहारनपुर से हुई, जो जून और जुलाई आते-आते नोएडा, गाज़ियाबाद, आगरा, फिरोज़ाबाद, झांसी, मैनपुरी, गोंडा, बस्ती और श्रावस्ती तक पहुँच गई।
अपनी हर जनसभा में योगी आदित्यनाथ अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर सीधा और आक्रामक हमला बोल रहे हैं। सीएम योगी अपनी रैलियों में लगातार अखिलेश यादव और राहुल गांधी को हिंदू विरोधी करार दे रहे हैं। वे जनता को बार-बार सपा शासनकाल के दौरान हुए गुंडाराज, दंगों और बदहाली की याद दिला रहे हैं, ताकि 2027 का चुनावी समीकरण पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में लामबंद हो सके। इतना ही नहीं विपक्ष की घेराबंदी करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार का मजबूत रिपोर्ट कार्ड भी जनता की अदालत में पेश कर रहे हैं। वे मंच से डंके की चोट पर बता रहे हैं कि जिस उत्तर प्रदेश को कभी बीमारू राज्य और अपराधियों का गढ़ माना जाता था, आज वही यूपी देश का सबसे बड़ा इन्वेस्टर्स हब बन चुका है!
सीएम योगी जनता को समझा रहे हैं कि कैसे सुरक्षा का बेहतर माहौल बनने से आज दुनिया भर के उद्योगपति यूपी में अरबों रुपये का निवेश कर रहे हैं, जिससे युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह है योगी आदित्यनाथ का वो मास्टर प्लान जिसने यूपी के सियासी अखाड़े में खलबली मचा दी है! एक तरफ 36,877 करोड़ का विकास कार्ड और दूसरी तरफ सपा-कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक हिंदुत्व और सुशासन का चक्रव्यूह!
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूला सीएम योगी के इस 43 जिलों वाले तूफानी दौरों की काट ढूंढ पाएगा? क्या राहुल और अखिलेश मिलकर बीजेपी के इस अभेद्य किले में सेंध लगा पाएंगे, या फिर योगी आदित्यनाथ 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाकर इतिहास रचने जा रहे हैं? चुनावी बिसात बिछ चुकी है और शह-मात का खेल शुरू हो चुका है!
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