उजागर हुआ योगी सरकार का चेहरा, कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी का बयान...

एक बार फिर से बीजेपी आदित्यनाथ सरकार का चेहरा उजागर हुआ है कि वह प्रदेश में जाति और धर्म की मानसिकता से ग्रसित होकर दुर्भावना से काम कर रही है.

NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) को लेकर एक रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने जनवरी 2018 से दिसंबर 2020 तक 120 लोगों पर असंवैधानिक तरीके से सत्ता का दुरुपयोग कर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत कार्यवाही की जिसमें 94 मामलों में माननीय उच्च न्यायालय ने क्वैश् कर रोक लगा दी.

यह दर्शाता है कि बीजेपी आदित्यनाथ सरकार अपराध नहीं रोक पा रही लेकिन लोगों पर राजनैतिक विद्वेष के तहत बदले की भावना से कार्यवाही कर रही है, इसी का परिणाम है कि जो अपराधी हैं वह पकड़ से दूर हैं और सरकार सिर्फ विद्वेषपूर्ण कार्यवाही में ब्यस्त और मस्त है.

कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी का बयान

रिपोर्ट के अनुसार सामुदायिक दंगों के मामलों में 20 एनएसए लगाए गए जिसमें सभी को हाईकोर्ट ने क्वैश् कर रोक लगा दी.राजनैतिक मामलों में विद्वेषवश  में 25 मामलों में NSA की कार्यवाही हुई जिसमें 20 को उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी.

गाय को लेकर सिर्फ राजनीति करने वाली BJP सरकार ने 41 मामलों में NSA के तहत कार्यवाही की लेकिन 30 मामलों ने उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी.
इसके अलावा 34 अन्य में भी NSA की कार्यवाही पर उच्च न्यायालय ने 24 पर रोक लगा दी.

यानि कुल 120 NSA कार्यवाही में 94 मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा क्वैश् किया जाना ये दर्शाता है कि सरकार BJP सरकार जाति और धर्म के भेदभाव की मानसिकता से ग्रसित है, उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर गौर करने की आवश्यकता है कि जिलाधिकारी N.S. A से इतना प्रेम क्यों करते हैं.यह दिखाता है कि भाजपा सरकार सत्ता के मद में चूर होकर लोगों पर गलत तरीके से मुकदमे लाद रही है जो वास्तव में अपराधी हैं उन पर लगाम लगाने के बजाय सिर्फ सत्ता का दुरुपयोग कर राजनैतिक विद्वेष वश लोगों को पीड़ित कर रही परेशान कर रही है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि एफआईआर में लिखी गई बात ही नहीं, यहां तक कि एनएसए लगाने के आदेशों में डीएम द्वारा बताए गए आधार भी करीब-करीब एक जैसे हैं. जैसे कि-

गो हत्या से जुड़े सात मामलें में आरोप लगाते हुए, एनएसए आदेश में लिखा है कि "भय और आतंक के माहौल ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है".

छह मामलों में, NSA के आदेशों में छह समान बातों का इस्तेमाल किया गया: कुछ "अज्ञात व्यक्ति" मौके से भाग गए; घटना के कुछ मिनट बाद, पुलिस कर्मियों पर "हमला" किया गया; पुलिस पार्टी पर हमले के कारण, "लोगों ने भागना शुरू कर दिया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई"; लोग "सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए दौड़ने लगे"; "माहौल के कारण, लोग अपने रोज मर्रा के काम में शामिल नहीं हो रहे हैं"; आरोपी के कार्य के कारण, "क्षेत्र की शांति और कानून और व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब हो गई थी".

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