ग्राम पंचायत बदवार में विकास के दावों पर सवाल, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
रेवा- ग्राम पंचायत बदवार में विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए एक पोस्टर में पंचायत की शिक्षा, बिजली, पानी निकासी, साफ-सफाई, मच्छरों की समस्या, आवारा मवेशियों और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
पोस्टर में आरोप लगाया गया है कि गांव में विकास के नाम पर अपेक्षित कार्य नहीं हो रहे हैं, जबकि ग्रामीणों को शिक्षा, बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्कूल की व्यवस्था पर सवाल
पोस्टर में दावा किया गया है कि स्कूल में विद्यार्थियों की कमी के साथ-साथ समय पर स्कूल नहीं खुलने और भवन के रखरखाव की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
बिजली और पानी निकासी की समस्या
बिजली व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि आए दिन बिजली गुल रहती है तथा शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा। वहीं, नालियों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। बारिश के दौरान गांव में जलभराव की स्थिति बनने का दावा किया गया है।
मच्छरों और आवारा मवेशियों से ग्रामीण परेशान
पोस्टर में बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने और नियमित फॉगिंग व सफाई नहीं होने की बात कही गई है। इसके अलावा आवारा मवेशियों द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए पंचायत स्तर पर कांजी हाउस अथवा गोशाला जैसी व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई गई है।
पंचायत कार्यों में कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग
पोस्टर में पंचायत के कार्यों में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि गांव के विकास के लिए आने वाली राशि का सही उपयोग नहीं हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत में हुए निर्माण एवं विकास कार्यों, स्वीकृत राशि, खर्च और कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
ग्रामीणों की मांग—पंचायत के कामकाज का हो सार्वजनिक ऑडिट
ग्रामीणों की ओर से शिक्षा, बिजली, पानी निकासी, साफ-सफाई, मच्छर नियंत्रण, आवारा मवेशियों की समस्या और विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही पंचायत में स्वीकृत एवं पूर्ण कार्यों की जानकारी सार्वजनिक करने और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
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