ममता हुई शर्मसार, नवजात को खेत में छोड़ गई मां, महिला टीआई गीता जाटव ने पेश की इंसानियत की मिसाल
झाबुआ : झाबुआ जिले के रायपुरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम देवली में मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। कपास और मक्का के खेत में एक नवजात शिशु लावारिस हालत में पड़ा मिला। मासूम को इस तरह खेत में छोड़ देने की घटना ने जहां मां की ममता और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं रायपुरिया थाना प्रभारी गीता जाटव ने एक महिला होने के नाते मातृत्व की संवेदना को समझते हुए जिस तत्परता और ममता के साथ नवजात को संभाला, उसकी हर ओर सराहना हो रही है।
खेत में पड़ा था मासूम, सूचना मिलते ही पहुंचीं टीआई
जानकारी के अनुसार देवली गांव में खेत में एक नवजात शिशु के लावारिस हालत में पड़े होने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही रायपुरिया थाना प्रभारी गीता जाटव ने बिना देर किए मौके पर पहुंचकर नवजात को अपनी गोद में उठाया। ठंड और खुले खेत में पड़े होने के कारण मासूम की हालत नाजुक बताई गई। टीआई गीता जाटव ने पुलिस वाहन से नवजात को तत्काल पेटलावद अस्पताल पहुंचाया, जहां शिशु रोग विशेषज्ञ की देखरेख में उसे भर्ती कराया गया।
रातभर ठंड में पड़ा रहा मासूम, हालत नाजुक
चिकित्सक के अनुसार नवजात के रात से ही ठंड में पड़े रहने की आशंका है, जिसके चलते उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। हालांकि चिकित्सकों ने उम्मीद जताई है कि उचित उपचार और देखभाल से मासूम के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। फिलहाल नवजात का उपचार जारी है और चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
मां की ममता पर उठे सवाल, कौन छोड़ गया मासूम को?
जिस मां की गोद में नवजात को दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह मिलनी चाहिए थी, उसी मां द्वारा मासूम को खेत में छोड़ दिए जाने की घटना ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर दिया है। नवजात को इस तरह असहाय अवस्था में छोड़ देना निर्दयता की हद है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी रही होगी कि एक मां अपने ही नवजात को खुले खेत में जीवन और मौत के बीच छोड़कर चली गई? मां की ममता को दुनिया में सबसे पवित्र रिश्तों में माना जाता है। ऐसे में इस मासूम को खेत में छोड़ने की घटना न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि समाज के सामने कई सवाल भी खड़े करती है।
वर्दी में महिला, लेकिन दिल में मां जैसी ममता
इस पूरे घटनाक्रम में रायपुरिया थाना प्रभारी गीता जाटव की भूमिका मानवीय संवेदनाओं की मिसाल बनकर सामने आई है। वे भी एक महिला हैं और मातृत्व की पीड़ा को समझती हैं। लेकिन वर्दी के कर्तव्य के साथ उन्होंने जिस संवेदनशीलता से नवजात को अपनी गोद में उठाया और समय गंवाए बिना अस्पताल पहुंचाया, वह पुलिस की मानवीय छवि को सामने लाता है। एक ओर जहां किसी ने नवजात को खेत में बेसहारा छोड़ दिया, वहीं दूसरी ओर महिला पुलिस अधिकारी ने उसे अपनेपन से संभालकर जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी निभाई। यही अंतर इस घटना को और अधिक मार्मिक बना देता है।
कर्तव्य के साथ इंसानियत भी निभाई
टीआई गीता जाटव की तत्परता ने यह साबित किया कि पुलिस की वर्दी केवल कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय पुलिसकर्मी इंसानियत की मिसाल भी पेश कर सकते हैं। नवजात को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने में दिखाई गई उनकी संवेदनशीलता और तत्परता की क्षेत्रवासियों द्वारा सराहना की जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस मासूम को खेत में छोड़कर जाने वाली मां कौन है और आखिर उसने ऐसा कदम क्यों उठाया? पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही इस घटना की पूरी सच्चाई सामने आएगी और नवजात को इस हालत में छोड़ने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होगी।फिलहाल सबकी दुआएं उस नन्ही जान के साथ हैं, जो जिंदगी की पहली लड़ाई लड़ रहा है। वहीं टीआई गीता जाटव जैसी संवेदनशील पुलिस अधिकारी ने यह संदेश दिया है कि वर्दी के पीछे भी एक धड़कता हुआ दिल होता है—और कभी-कभी वही दिल किसी मां की ममता बनकर एक नन्ही जिंदगी को बचाने के लिए आगे आता है।
रिपोर्टर : मनीष कुमट
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