धान की नर्सरी से लेकर लगवाई तक सूखी रही नहर,किसानों के सैकड़ों बीघे नहीं लग पाया धान
सुल्तानपुर : लम्भुआ कोतवाली क्षेत्र के चांदा रजबहा से जुड़े दर्जनों गांवों के किसानों के सामने नहर में पानी न आने से परेशान हैं। धान की नर्सरी तैयार करने से लेकर खेतों में रोपाई तक नहर में एक बूंद पानी नहीं आया। नतीजा यह हुआ कि क्षेत्र के सैकड़ों बीघा धान की फसल नहीं लग सकी और किसानों की मेहनत व पैसा दोनों बर्बाद हो गए।
समय निकल गया, उम्मीद टूटी
किसानों का कहना है कि हर साल जुलाई के पहले सप्ताह तक रोपाई पूरी हो जाती थी। इस बार धान लगाने की समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है, लेकिन चांदा रजबहा आज तक सूखा पड़ा है। कई किसानों ने कर्ज लेकर नर्सरी तैयार की थी, लेकिन पानी न मिलने से वह भी सूख गई।
पटखौली के किसान मनोज पाठक,इंद्रभूषण पाठक ने बताया "नर्सरी पर 8 हजार रुपये खर्च कर दिए। अब न रोपाई हो पाई न बीज वापस मिला।"
किसान राजेश ने कहा "ट्यूबवेल से सिंचाई महंगी है। 1 बीघा में 3 हजार का डीजल लग जाएगा। गरीब किसान कहां से करेगा।"
पिछले 1 महीने से स्थानीय मीडिया लगातार नहर में पानी न आने का मामला उठा रहा है। किसानों ने कई बार प्रार्थना पत्र भी दिए, लेकिन न सिंचाई विभाग ने सुध ली और न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने आवाज उठाई।
किसानों का आरोप है कि लम्भुआ विधानसभा आज नेता विहीन हो चुकी है। यहां किसानों की समस्या प्रशासन से लेकर शासन तक पहुंचाने वाला कोई नहीं है।
आक्रोशित किसानों ने कहा कि सरकार "जय जवान जय किसान" का नारा देती है, लेकिन धरातल पर किसान को ही अनदेखा किया जा रहा है। जब फसल ही नहीं लगेगी तो किसान कर्ज कैसे चुकाएगा और जनता जनप्रतिनिधियों का सम्मान कैसे करेगी।
किसानों ने जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग से मांग की है कि तत्काल चांदा रजबहा में पानी छोड़ा जाए और जिन किसानों की फसल नहीं लगी उनके नुकसान की भरपाई की जाए। अन्यथा मजबूरन किसान आंदोलन को बाध्य होंगे।
रिपोर्टर : वाजिद हुसैन
No Previous Comments found.