ट्रंप की जीत का सटीक अनुमान लगाने वाले ‘चीन के नोस्त्रेदमस’ की 5 नई भविष्यवाणियां, 2027 को लेकर डरावनी चेतावनी
अमेरिकी राजनीति और ईरान के साथ जारी तनाव के बीच साल 2027 को लेकर एक चीनी भविष्यवक्ता की भविष्यवाणियों ने लोगों का ध्यान खींचा है। खुद को जियोपॉलिटिक्स का विश्लेषक बताने वाले जियांग ज्यूकिन का दावा है कि आने वाले समय में अमेरिका को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

ज्यूकिन को अक्सर ‘चीन का नॉस्त्रेदमस’ कहा जाता है। करीब दो साल पहले उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की 2024 में वापसी, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उस युद्ध में अमेरिका की संभावित हार को लेकर तीन दावे किए थे। उनके मुताबिक, इनमें से शुरुआती दो बातें सच हो चुकी हैं, जबकि तीसरी भविष्यवाणी का नतीजा अभी सामने आना बाकी है।
अब ज्यूकिन ने 2027 को लेकर पांच नई भविष्यवाणियां सामने रखी हैं। इनमें अमेरिका में बढ़ते विरोध-प्रदर्शन से लेकर सैन्य भर्ती और आर्थिक संकट तक की तस्वीर पेश की गई है।
1. ICE की बढ़ती ताकत और सड़कों पर नेशनल गार्ड
ज्यूकिन का अनुमान है कि ट्रंप प्रशासन आने वाले समय में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट यानी ICE को और अधिक अधिकार दे सकता है।
अमेरिका में इमिग्रेशन नीति पहले ही बेहद संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। ICE की कार्रवाई को लेकर कई जगहों पर विरोध और तनाव देखने को मिल चुका है। ज्यूकिन का मानना है कि अगर आर्थिक दबाव और सामाजिक असंतोष बढ़ता है, तो हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि देश के बड़े शहरों में नेशनल गार्ड की तैनाती तक करनी पड़े।
उनके मुताबिक, सैन्य तैयारियों और घरेलू अशांति का यह मेल 2027 में अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
2. अमेरिका में ‘लो-लेवल’ सिविल कॉन्फ्लिक्ट का खतरा
ज्यूकिन की दूसरी भविष्यवाणी इससे भी ज्यादा गंभीर है। उनका कहना है कि 2027 तक अमेरिका में ऐसे हालात बन सकते हैं, जिन्हें व्यापक अर्थों में गृह संघर्ष कहा जा सके।
हालांकि, वे इसे पारंपरिक सिविल वॉर की तरह दो संगठित सेनाओं के बीच युद्ध नहीं मानते। उनके अनुसार असली खतरा लगातार होने वाले प्रदर्शनों, दंगों, सामाजिक टकराव और विद्रोही गतिविधियों से पैदा होगा।
यानी उनका अनुमान किसी एक बड़े युद्ध के बजाय लंबे समय तक चलने वाली घरेलू अशांति की ओर इशारा करता है।
3. युवाओं के लिए अनिवार्य सैन्य भर्ती की तैयारी?
ज्यूकिन की तीसरी भविष्यवाणी अमेरिका की सैन्य व्यवस्था से जुड़ी है। उनका दावा है कि 2027 में अमेरिका अनिवार्य सैन्य भर्ती यानी कंपलसरी मिलिट्री ड्राफ्ट की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
उनका तर्क है कि अगर ईरान के साथ संघर्ष लंबा खिंचता है और अमेरिका को जमीनी स्तर पर बड़ी सैन्य मौजूदगी बनाए रखनी पड़ती है, तो सेना को अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है।
इसी वजह से वह आशंका जताते हैं कि 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के युवाओं को सैन्य सेवा के लिए बुलाने की व्यवस्था तैयार की जा सकती है।
हालांकि, यह ज्यूकिन का अनुमान है, न कि अमेरिकी सरकार की घोषित नीति।
4. 2026 के मिडटर्म चुनावों में अप्रत्याशित नतीजे
ज्यूकिन की एक भविष्यवाणी सीधे अमेरिकी चुनावी राजनीति से जुड़ी है। नवंबर 2026 में होने वाले मिडटर्म चुनाव यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि अमेरिकी कांग्रेस में किस पार्टी का प्रभाव रहेगा।
ज्यूकिन का मानना है कि इन चुनावों में ऐसे परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जिनकी मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के आधार पर आसानी से उम्मीद नहीं की जा रही है।
उन्होंने SAVE America Act को लेकर भी चिंता जताई है। उनके मुताबिक, नागरिकता के प्रमाण और वोटर वेरिफिकेशन को लेकर कड़े नियम चुनावी प्रक्रिया पर असर डाल सकते हैं।
उनका कहना है कि इसका मतलब चुनाव रद्द होना नहीं है, बल्कि चुनावी नतीजों और राजनीतिक समीकरणों में अप्रत्याशित बदलाव हो सकता है।
5. ईरान युद्ध लंबा चला तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी असर
ज्यूकिन की सबसे बड़ी आर्थिक चेतावनी ईरान के साथ संभावित लंबे सैन्य संघर्ष को लेकर है।
उनका अनुमान है कि यदि अमेरिका ईरान में जमीनी सैनिक भेजता है और संघर्ष कई वर्षों तक चलता है, तो इसका आर्थिक बोझ बेहद भारी हो सकता है। खास तौर पर अगर युद्ध चार-पांच साल तक जारी रहता है और अमेरिका को सैन्य रूप से अपेक्षित सफलता नहीं मिलती, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ने की आशंका है।
ज्यूकिन की राय में ऐसी स्थिति केवल अमेरिका की समस्या नहीं होगी। दुनिया की अर्थव्यवस्था में अमेरिकी भूमिका को देखते हुए, वहां पैदा होने वाला बड़ा आर्थिक संकट वैश्विक बाजारों को भी प्रभावित कर सकता है।
आखिर ज्यूकिन किस आधार पर करते हैं ये दावे?
जियांग ज्यूकिन अपनी भविष्यवाणियों को पारंपरिक ज्योतिष या भविष्यवाणी की किसी रहस्यमयी पद्धति से जोड़ने के बजाय ‘गेम थ्योरी’ से जोड़ते हैं।

उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय राजनीति को समझने के लिए सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि इस पूरे खेल में कौन-कौन से खिलाड़ी हैं, उनके लक्ष्य क्या हैं और वे अपने फायदे के लिए किस तरह की रणनीति अपना सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर अमेरिका, ईरान, इजराइल और सऊदी अरब को अलग-अलग रणनीतिक खिलाड़ी मानकर उनके संभावित कदमों का आकलन किया जा सकता है।
ज्यूकिन का दावा है कि जब इन देशों के हित, उनकी रणनीतियां और संभावित प्रतिक्रियाएं एक साथ समझी जाती हैं, तो भविष्य में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, इन दावों को भविष्य की निश्चित घटनाओं के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। ज्यूकिन की भविष्यवाणियां उनके अपने जियोपॉलिटिकल आकलन पर आधारित हैं और 2027 में इनमें से कितनी बातें वास्तव में होती हैं, यह आने वाला समय ही बताएगा।
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