69 हजार शिक्षक भर्ती: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का संघर्ष जारी...
उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कोर्ट से अब तक 20 से ज्यादा तारीखें मिल चुकी हैं, लेकिन अभी तक किसी भी तरह की ठोस सुनवाई नहीं हुई है। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने अब लखनऊ में मंत्रियों के आवासों का घेराव शुरू कर दिया है।
मंगलवार को प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास की ओर कूच किया। इसी बीच योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ये सभी अभ्यर्थी देश के नागरिक हैं और पढ़े-लिखे युवा हैं। इनकी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए।
मंत्री संजय निषाद ने कहा, "जब तक मामला अदालत में है, तब तक उस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। कोर्ट पर सभी को भरोसा रखना चाहिए। लेकिन सरकार को चाहिए कि अगर संभव हो तो इस मसले को विधायिका के माध्यम से सुलझाया जाए।"
उन्होंने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा और कहा कि पहले जो गलत नियम बनाए गए थे, उनके कारण आज यह स्थिति बनी है। अब जब मौजूदा सरकार को मौका मिला है, तो योग्य और चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यधारा में लाना चाहिए।
संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब सपा सत्ता में थी, तब उन्होंने इन मुद्दों पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई। अब जब वे विपक्ष में हैं, तो सिर्फ सड़क पर बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने न तो यूपी विधानसभा में और न ही संसद में इन अभ्यर्थियों के लिए आवाज उठाई।
मंत्री ने साफ कहा, जो पढ़ेगा, वही बढ़ेगा। पढ़े-लिखे युवाओं को जातियों में नहीं बांटना चाहिए। विपक्ष का असली काम जनता के मुद्दों को सदन में उठाना होता है, लेकिन समाजवादी पार्टी यह काम बाहर दिखावे के लिए कर रही है।

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