भारत का कृषि निर्यात नई ऊंचाई पर, AAHAR 2026 में दिखी 5 लाख करोड़ की ताकत

भारत का किसान अब सिर्फ अपने गांव या स्थानीय मंडी तक सीमित नहीं रहा। उसकी उपज अब दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंच रही है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 10 से 14 मार्च तक आयोजित AAHAR 2026 अंतरराष्ट्रीय खाद्य और आतिथ्य मेले में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने भारतीय कृषि निर्यात की पूरी क्षमता एक मंच पर पेश की।

5 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक कृषि निर्यात

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने AAHAR 2026 का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत का कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात अब हर साल 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, फल, दालें और सब्जियों के निर्यात में तेजी से वृद्धि हुई है। इसका सीधा फायदा देश के किसानों, मछुआरों और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों को मिल रहा है, जिनकी मेहनत अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रही है।

नए व्यापार समझौतों से खुले वैश्विक बाजार

मंत्री गोयल ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड सहित कई यूरोपीय देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इसके अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, ओमान और मॉरीशस के साथ भी व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं।

उन्होंने बताया कि कनाडा और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इन समझौतों से भारतीय कृषि उत्पादों को दुनिया के लगभग दो-तिहाई व्यापारिक बाजारों में कम शुल्क पर पहुंच मिल रही है, जिससे किसानों, छोटे उद्यमियों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

खीरा, काजू, अनानास और अनार पर विशेष रणनीति

AAHAR 2026 में APEDA ने ICRIER के साथ मिलकर तैयार की गई चार विशेष शोध रिपोर्ट भी जारी कीं। ये रिपोर्ट खीरा, काजू, अनानास और अनार पर केंद्रित हैं।

इन रिपोर्टों में आपूर्ति श्रृंखला, निर्यात की संभावनाओं और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की रणनीति पर विस्तृत जानकारी दी गई है। इससे किसानों और निर्यातकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन उत्पादों में अधिक संभावनाएं हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।

GI उत्पादों के लिए नई पैकेजिंग तकनीक

APEDA ने भारतीय पैकेजिंग संस्थान के साथ मिलकर कुछ खास क्षेत्रीय कृषि उत्पादों के लिए नई पैकेजिंग और तकनीकी मानक तैयार किए हैं। इनमें शामिल हैं:

असम का कार्बी आंगलोंग अदरक
महाराष्ट्र की G4 मिर्च
जलगांव का केला
असम का काजी नेमू नींबू
प्रयागराज का सुर्खा अमरूद

बेहतर पैकेजिंग से इन उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।

18 राज्यों की भागीदारी, 100 से अधिक निर्यातक

करीब 2,500 वर्ग मीटर में फैले APEDA मंडप में 100 से अधिक निर्यातक, उत्पादक संगठन, स्टार्टअप और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शामिल हुईं।

इस आयोजन में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित 18 राज्यों ने अपने-अपने मंडप लगाए।

पांच दिन तक चले इस मेले में एक लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।

बासमती से लेकर प्लांट-बेस्ड फूड तक

APEDA मंडप में बासमती और गैर-बासमती चावल, जैविक उत्पाद और प्लांट-बेस्ड फूड को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।

प्लांट-बेस्ड यानी पौधों से बने खाद्य उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और भारत के लिए यह एक नया और बड़ा निर्यात अवसर बनकर उभर रहा है।

मंडप में एक प्रसिद्ध शेफ ने भारतीय कृषि उत्पादों से बने कई नए और आकर्षक व्यंजन बनाकर भी दिखाए, जिसने दर्शकों का खास ध्यान खींचा।

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