मौलाना अब्दुल्ला सलीम गिरफ्तार, योगी की मां पर विवादित बयान का पर्दाफाश

कहते हैं कानून के लंबे हाथ जब चलते हैं, तो सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं! जी हां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां और करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र गौमाता के खिलाफ जहर उगलने वाले मौलाना अब्दुल्ला सलीम का घमंड अब खाक में मिल चुका है। रमजान के पवित्र महीने में मजहबी जलसे के नाम पर गाली-गलौज और भड़काऊ बयानबाजी करने वाला यह शख्स सोच रहा था कि बिहार के पूर्णिया में छिपकर वह बच जाएगा। लेकिन UP STF की 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी कार्रवाई ने उसे दिन-दहाड़े उसके ठिकाने से उठा लिया। सादी वर्दी में पहुँचे जांबाजों ने जब मौलाना को घेरा, तो एक पल के लिए हड़कंप मच गया, पर अब इंसाफ की गाड़ी उत्तर प्रदेश की ओर मुड़ चुकी है। आइए जानते हैं नफरत के इस सौदागर की गिरफ्तारी की पूरी इनसाइड स्टोरी!

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ मार्च की शुरुआत में वायरल हुआ एक वीडियो है। मूल रूप से बिहार के अररिया का रहने वाला मौलाना अब्दुल्ला सलीम एक मजहबी सभा को संबोधित कर रहा था। जोश-जोश में होश खोते हुए उसने उत्तर प्रदेश के गौकशी कानूनों की आलोचना शुरू की, लेकिन देखते ही देखते वह अपनी मर्यादा लांघ गया। मौलाना ने न सिर्फ गौमाता के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की मां के लिए भी ऐसी आपत्तिजनक और गाली-गलौज भरी भाषा का प्रयोग किया जिसे सुना भी नहीं जा सकता। 

वहीं जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर बिजली की तरह फैला, पूरे उत्तर प्रदेश में उबाल आ गया। लखनऊ से लेकर बहराइच और कानपुर से लेकर बलरामपुर तक, हर तरफ इस मजहबी नफरत के खिलाफ आक्रोश की लहर दौड़ गई।
राजधानी लखनऊ के हजरतगंज, परिवर्तन चौक और गांधी पार्क जैसे वीवीआईपी इलाकों में रातों-रात मौलाना के खिलाफ नफरत वाले पोस्टर लग गए। युवाओं और विभिन्न हिंदू संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। बीजेपी विधायक सुरेंद्र दिलेर, सांसद रवि किशन और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने इस बयान की कड़ी निंदा की। वहीं कई संगठनों ने मांग की कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश रचने वाले इस मौलाना पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई हो। फिर क्या था, देखते ही देखते यूपी के अलग-अलग जिलों में मौलाना के खिलाफ 120 से ज्यादा शिकायतें और मुकदमे दर्ज हो गए। यूपी पुलिस के लिए अब वह 'मोस्ट वांटेड' बन चुका था। हालांकि मौलाना बयान देकर फरार हो गया था और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। उसने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को सड़कों पर उतरने के लिए उकसाने की भी कोशिश की, ताकि गिरफ्तारी से बचा जा सके। लेकिन यूपी STF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने उसकी हर चाल पर पानी फेर दिया। खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने उसे बिहार के पूर्णिया जिले में लोकेट किया। जिसके बाद पुलिस टीम सादी वर्दी में पहुंची ताकि किसी को शक न हो। जब पुलिस उसे ले जाने लगी, तो स्थानीय लोगों को लगा कि यह किसी का अपहरण हो रहा है। मौके पर काफी भ्रम की स्थिति पैदा हुई, लेकिन जब स्थानीय विधायक ने थाने से पुष्टि की कि यह कानूनी कार्रवाई है, तब जाकर मामला शांत हुआ। वहीं गिरफ्तारी का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी मौलाना को पकड़कर ले जाते दिख रहे हैं। वहीं अब शहर कोतवाली में उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस बात की तह तक जा रही है कि:

क्या इस भड़काऊ बयान के पीछे कोई गहरी सांप्रदायिक साजिश थी?

क्या मौलाना के पीछे कोई ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है जो चुनाव या त्योहारों के समय माहौल बिगाड़ना चाहता है?

उसके पुराने रिकॉर्ड्स और किन-किन कट्टरपंथी संगठनों से उसके तार जुड़े हैं?

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये मौलाना है कौन, जिसने सीएम योगी की मां पर इस तरह का बयान देने की हिम्मत की। तो आपको बता दें मौलाना अब्दुल्ला सलीम कासमी, जिन्हें चतुर्वेदी नाम से भी जाना जाता है, सीमांचल क्षेत्र में एक चर्चित इस्लामिक स्कॉलर हैं, उनके भाषण यूट्यूब और सोशल मीडिया पर काफी देखे जाते हैं। वे धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं, हालांकि उनके बयानों को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं। उनके नाम के साथ ‘चतुर्वेदी’ जोड़ने को लेकर भी पहले विवाद हो चुका है। राजनीतिक तौर पर मौलाना अब्दुल्ला सलीम पहले ओवैसी की पार्टी AIMIM से जुड़े रहे। हालांकि साल 2025 में जोकीहाट विधानसभा से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ दी और फिर वह प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी से जुड़ गए। हालांकि उनका नामांकन पत्र निर्वाचन आयोग ने खारिज कर दिया था।

कुल मिलाकर मौलाना की ये गिरफ्तारी बताती है कि यूपी मॉडल में नफरत फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री की मां और करोड़ों की आस्था का अपमान करने वाले मौलाना ने जिस आग को हवा दी थी, अब उसी कानूनी आंच में वह खुद झुलस रहा है। बिहार से यूपी तक का यह सफर मौलाना के लिए सबक होने वाला है। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने यह संदेश दे दिया है कि आप चाहे किसी भी कोने में छिप जाएं, अगर आपने शांति और सद्भाव से खिलवाड़ किया, तो कानून का बुलडोजर आपके अहंकार को कुचलने में देर नहीं लगाएगा। अब देखना होगा कि पूछताछ में नफरत की इस दुकान के पीछे और कितने चेहरे बेनकाब होते हैं!

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