वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन ने जटिल सर्जरी कर बचाई जान

आगरा : शहर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक झोलाछाप की अज्ञानता और गलत इलाज के कारण मात्र 1 सप्ताह के नवजात शिशु की जान खतरे में पड़ गई। झोलाछाप द्वारा नाभि की हर्निया (Umbilical Hernia) पर ब्लेड चलाने से बच्चे की आंतें शरीर से बाहर आ गईं (Evisceration) और उनमें छेद (Perforation) हो गया। गंभीर हालत में बच्चे को पुष्पांजलि हॉस्पिटल लाया गया, जहाँ वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ.  राहुल देव शर्मा ने जटिल सर्जरी कर बच्चे को नया जीवनदान दिया।

क्या था पूरा मामला?

एक परिवार अपने 7 दिन के नवजात शिशु को नाभि में सूजन (Umbilical Hernia) की शिकायत लेकर एक स्थानीय झोलाछाप के पास गया था। झोलाछाप ने इसे सामान्य फोड़ा समझकर या अज्ञानता वश उस पर चीरा लगा दिया। चीरा लगते ही बच्चे की कोमल आंतें पेट से बाहर निकल आईं और उनमें भी जगह-जगह कट लग गए। इस भयानक स्थिति के बाद परिजन बच्चे को लेकर आनन-फानन में हॉस्पिटल पहुंचे। उस समय बच्चे की आंतें बाहर थीं और संक्रमण का खतरा बहुत अधिक था। बच्चे की जान बचाने के लिए तुरंत ऑपरेशन की जरूरत थी।

जटिल सर्जरी और इलाज की प्रक्रिया

वरिष्ठ बाल रोग सर्जन डॉ.  राहुल देव शर्मा ने बताया कि बच्चे को जब अस्पताल लाया गया, तो उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी। आंतों में छेद होने के कारण पेट में संक्रमण फैलने का खतरा था। टीम ने तुरंत निर्णय लेते हुए बच्चे की 'लैपरोटॉमी' (Laparotomy - पेट खोलकर सर्जरी) की। सर्जरी के दौरान आंतों के जिस हिस्से में छेद और सड़न थी, उसे काट कर निकाला गया (Resection) और स्वस्थ हिस्सों को आपस में जोड़ा गया (Anastomosis)। चूंकि आंतें बहुत कमजोर थीं, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से पेट के रास्ते मल निकास के लिए एक कृत्रिम रास्ता बनाया गया, जिसे 'Divided Stoma' कहते हैं।

सफल रिकवरी और डिस्चार्ज

घंटों चली इस जटिल सर्जरी के बाद बच्चे को एनआईसीयू (NICU) की निगरानी में रखा गया। डॉ. Rahul Deo Sharma की देखरेख में बच्चा अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। बच्चा अब माँ का दूध (Feed) अच्छे से ले रहा है। सर्जरी के दौरान बनाया गया स्टोमा (Stoma) ठीक से काम कर रहा है। बच्चे का वजन बढ़ रहा है और वह स्वस्थ है। बच्चे की अच्छी रिकवरी को देखते हुए आज उसे अस्पताल से छुट्टी (Discharge) दी जा रही है। डॉक्टर की सलाह और चेतावनी इस मामले पर चिंता जताते हुए डॉ. Rahul Deo Sharma ने आम जनता और अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है:
"नवजात बच्चों में नाभि का हर्निया (Umbilical Hernia) बहुत ही सामान्य समस्या है। 90% मामलों में यह समय के साथ अपने आप ठीक हो जाता है। इसमें किसी भी तरह के चीरे या ऑपरेशन की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और न ही इस पर सिक्का या पट्टी बांधनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात, कभी भी बच्चों के इलाज के लिए झोलाछाप के पास न जाएं। आज इस बच्चे की जान बच गई,यह ईश्वर की कृपा और सही समय पर सर्जरी का परिणाम है, लेकिन ऐसी लापरवाही जानलेवा हो सकती है।" यह घटना इस बात का प्रमाण है कि विशेषकर नवजात शिशुओं के मामले में केवल विशेषज्ञ (Pediatric Surgeon) की सलाह ही लेनी चाहिए।

रिपोर्टर - अनुज उपाध्याय

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