एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा में पहली बार लेज़र प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी का सफल शुभारंभ — आईसीएमआर ने दी शोध परियोजना को मंजूरी, आधुनिक उपचार से आम मरीजों को मिलेगा बड़ा लाभ
आगरा : सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एस.एन. मेडिकल कॉलेज), आगरा ने शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए प्रॉक्टोलॉजी (पाइल्स, फिशर, फिस्टुला एवं पाइलोनाइडल साइनस) के उपचार हेतु पहली बार लेज़र प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी का सफल शुभारंभ किया है। इसके साथ ही भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने इस विषय पर एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है, जिसके अंतर्गत लेज़र सर्जरी के परिणामों, सुरक्षा, प्रभावशीलता एवं दीर्घकालिक लाभों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। आईसीएमआर अनुसंधान परियोजना के अन्वेषक हैं प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता, डॉ. अनुभव गोयल एवं डॉ. करण आर. रावत, जबकि मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट से डॉ. बृजेश शर्मा इस शोध परियोजना के वैज्ञानिक समन्वय एवं अनुसंधान संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह अध्ययन पाइल्स, फिशर, फिस्टुला एवं पाइलोनाइडल साइनस जैसे सामान्य लेकिन गंभीर प्रभाव डालने वाले रोगों में लेज़र सर्जरी के परिणामों का भारतीय परिस्थितियों में वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगा। इससे भविष्य में देशभर के मरीजों के लिए साक्ष्य-आधारित उपचार को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायता मिलेगी। इस परियोजना के माध्यम से सरकारी मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को विश्वस्तरीय आधुनिक लेज़र तकनीक का लाभ मिलेगा। साथ ही भारतीय मरीजों पर आधारित वैज्ञानिक आंकड़े तैयार होंगे, जो भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय उपचार दिशानिर्देशों के निर्माण में उपयोगी सिद्ध होंगे। इससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को भी आधुनिक एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि एस.एन. मेडिकल कॉलेज हमेशा से उपचार के साथ-साथ उच्चस्तरीय अनुसंधान को भी प्राथमिकता देता रहा है। आईसीएमआर द्वारा इस परियोजना को स्वीकृति मिलना संस्थान की शैक्षणिक एवं शोध क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी के क्षेत्र में नई वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करेगा तथा मरीजों के हित में उपचार की गुणवत्ता को और बेहतर बनाएगा। डॉ. अनुभव गोयल ने बताया कि लेज़र तकनीक ने प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। इससे मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव, शीघ्र रिकवरी तथा बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव परिणाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि इस शोध से भारतीय मरीजों में इन लाभों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा। डॉ. करण आर. रावत ने कहा कि आज भी अनेक मरीज पाइल्स, फिस्टुला एवं फिशर जैसी समस्याओं को शर्म या सर्जरी के डर के कारण वर्षों तक टालते रहते हैं। आधुनिक लेज़र तकनीक इन आशंकाओं को काफी हद तक समाप्त करती है और मरीजों को सुरक्षित, कम दर्द वाला तथा शीघ्र स्वस्थ होने वाला उपचार उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में इस तकनीक का प्रारंभ और आईसीएमआर समर्थित यह शोध परियोजना भविष्य में हजारों मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। डॉ. बृजेश शर्मा ने कहा
मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट से जुड़े डॉ. बृजेश शर्मा ने कहा कि किसी भी नई चिकित्सा तकनीक की वास्तविक सफलता उसके वैज्ञानिक प्रमाणों पर निर्भर करती है। यह अध्ययन उच्च गुणवत्ता के शोध मानकों के अनुरूप संचालित किया जाएगा, जिससे प्राप्त निष्कर्ष भविष्य में चिकित्सा विज्ञान एवं रोगी देखभाल दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजेश गुप्ता ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एस.एन. मेडिकल कॉलेज में आधुनिक तकनीकों एवं गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आईसीएमआर परियोजना न केवल संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी, बल्कि आम मरीजों को भी अत्याधुनिक एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पहल एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा को आधुनिक प्रॉक्टोलॉजी एवं न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अकादमिक एवं अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। आगरा में प्रॉक्टोलॉजी की पहली लेज़र सर्जरी का सफल संचालन डॉ. करण आर. रावत एवं डॉ. अनुभव गोयल के नेतृत्व में किया गया। इस ऐतिहासिक शल्य प्रक्रिया में डॉ. ईशान, *
डॉ. शिवली, डॉ. गंगा दुबे एवं डॉ. मुकुल ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। संपूर्ण प्रक्रिया को सुरक्षित एवं सफल बनाने में एनेस्थीसिया विभाग की टीम, जिसमें डॉ. रोहन एवं डॉ. अर्पिता शामिल रहे, ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेज़र प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी के प्रमुख लाभ
* पारंपरिक सर्जरी की तुलना में अत्यंत कम दर्द।
* न्यूनतम रक्तस्राव एवं ऊतकों को कम क्षति।
* अधिकांश मरीजों में शीघ्र रिकवरी एवं जल्दी सामान्य दिनचर्या में वापसी।
* संक्रमण एवं घाव संबंधी जटिलताओं की संभावना कम।
* अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहने की आवश्यकता।
* ऑपरेशन के बाद ड्रेसिंग एवं देखभाल अपेक्षाकृत आसान।
* जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार तथा कार्यक्षमता की शीघ्र वापसी।
रिपोर्टर : अनुज उपाध्याय
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