रेनबो आईवीएफ में मनाया उत्सव दिवस, हेल्थ कैंप लगाकर दिया मरीजों को दिया परामर्श
आगरा : रेनबो आईवीएफ में शनिवार को उत्सव दिवस मनाया गया। इस अवसर पर हेल्थ चेकअप कैंप लगाया गया। स्थापना दिवस पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर में मरीजों को बांझपन की बीमारियों के बारे में जानकारी दी और इससे जुड़े भ्रमों को भी दूर किया गया।
28 साल पहले की वह सुबह... जब मल्होत्रा नर्सिंग एंड मैटरनिटी होम में एक किलकारी ने न केवल एक दंपति के जीवन को खुशी से भर दिया, बल्कि उत्तर प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। यह वह दौर था जब टेस्ट ट्यूब बेबी को लोग एक चमत्कार मानते थे और बांझपन को भाग्य का लिखा समझकर स्वीकार कर लिया जाता था। 1 अगस्त, 1998 की वह सुबह आगरा के लिए एंड मेटरनिटी होम के राज्य के पहले प्राइवेट टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर ने आईवीएफ तकनीक से पहले शिशु को जन्म देने में सफलता पाई।
29 सालों में बदला परिदृश्य
आज मल्होत्रा टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर अपनी 29वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस दौरान सैकड़ों दंपति के सपने साकार किए गए। दिलचस्प बात यह है कि 1998 में आईवीएफ प्रक्रिया पर 1.25 लाख रुपये खर्च आता था, जबकि आज यह लागत मात्र 1.5 लाख रुपये है। डॉ जयदीप मल्होत्रा कहती हैं कि उस पहली सफलता ने हमें विश्वास दिलाया कि हम असंभव को संभव कर सकते हैं। आज भी जब उस नहीं बल्कि यह आती है, तो लगता है कि हमारा हर प्रयास सार्थक था।
चुनौतियों से भरा था सफर
डॉ. जयदीप मल्होत्रा के मुताबिक, उस समय आईवीएफ तकनीक नई थी और संसाधन सीमित। गर्भावस्था को आगे बढ़ाना अपने आप में एक चुनौती थी, क्योंकि मरीज उत्पादक और हाई बीपी की शिकार थी। उन दिनों आईवीएफ मीडिया आसानी से नहीं मिलता था और शॉर्ट एक्सपायरी होती थी। बिजली कटौती आम थी और अस्पताल को 2-3 जनरेटर लगवाने पड़े। उपकरणों की मरम्मत के लिए मुंबई से तकनीशियन बुलाना पड़ता, क्योंकि आगरा हवाई मार्ग से जुड़ा नहीं था। इतनी मुश्किलों के बावजूद सफलता दर 15 से 25% थी, जो आज 50 से 60% है।
अत्याधुनिक लैब
रेनबी आईवीएफ के डायरेक्टर और एम्ब्रोलॉजिस्ट डॉक्टर केशव मल्होत्रा ऑस्ट्रेलियाकी मनीला यूनिवर्सिटी से ट्रेंड है। उन्होंने बताया कि रेनबी में आधुनिक आईवीएफ लैब मौजूद है। देश का पहला इलेक्ट्रिक विटनेस लगा है जो मिसअप को रोकता है। लैब एम्ब्रोलॉजिस्ट, क्रायो फ्रीजर, लेजर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेटेड सीमेन एनलाइजर, 24 घंटे लैब मॉनिटरिंग और सिस्टम से लैस है, जो रेनबी आईवीएफ को देश की सबसे अत्याधुनिक लैब में एक बनाता है।
आईवीएफ के सफर को लगातार मिल रही सफलता
आज आईवीएफ के क्षेत्र में कीर्तिमान बना चुकी डॉक्टर जयदीप कहती हैं कि हमने रेनबो आईवीएफ के सफर को लगातार गति दी। समय-समय पर अत्याधुनिक तकनीक से सेंटर को अपडेट किया। हमारे पास अत्याधुनिक आईवीएफ लैब है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से ट्रेंड एम्ब्रोलॉजिस्ट है जो सेंटर के महत्वपूर्ण अंग होते हैं। 2004 में नेपाल में आईवीएफ सेंटर स्थापित किया। यह नेपाल का पहला आईवीएफ सेंटर था। अब तक करीब 20 हजार आईवीएफ बेबी पैदा हो चुके हैं। इनमें नेपाल में पैदा हुए तीन हजार बेबी भी शामिल हैं। उन्होंने बताया हमारे यहां दुनियाभर से निःसंतान दंपति इलाज के लिए आते हैं। हम उनके विश्वास पर पूरा उतरने का प्रयास करते हैं। वे बताती हैं कि हमने भारत के प्रसिद्ध तीन मेडिकल कॉलेजों में आईवीएफ लैब स्थापित कराए हैं। उनकी हर तरह की सहायता भी कर रहे हैं। रेनबी आईवीएफ सेंटर प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी सर्वप्रिय है। अपने यहां देश-विदेश से टेक्नीशियन और एम्ब्रोलॉजिस्ट आते हैं।
2024 में मनीला में एस्पायर डिस्टिगिश अवार्ड से सम्मानित
आईवीएफ के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विश्व स्तर पर डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा को समय-समय पर सम्मानित किया जा चुका है। 2024 में मनीला में एस्पायर डिस्टिगिश अवार्ड मिला। 2018 में उन्होंने डॉक्टर ने साइटी फॉर्मेट इंडेक्टर एंड फॉर्मेटलिटी (आईएसएसआरएफ) को और से लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नेपाल के पहले और फिर हजारों आईवीएफ शिशुओं का जन्म कराने का रिकॉर्ड डॉ जयदीप और डॉ नरेंद्र मल्होत्रा के नाम है। उन्हें नेपाल सम्मान से वहां की सरकार की ओर से नवाजा जा चुका है।
रिपोर्टर : अनुज उपाध्याय
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