13 वर्षीय किशोरी में मिला पित्त नली का दुर्लभ ट्यूमर, सर्जरी कर बचाई जान

आगरा : पित्त नली में दुर्लभ पूर्व-कैंसरयुक्त (प्री-मैलिग्नेंट) ट्यूमर से पीड़ित 13 वर्षीय बच्ची को उजाला सिग्नस रेनबो अस्पताल में सफल सर्जरी कर नई जिंदगी दी गई। आमतौर पर इस प्रकार का ट्यूमर 50 से 70 वर्ष की आयु के वयस्क या बुजुर्ग मरीजों में पाया जाता है, लेकिन किशोरी में मिलना चिकित्सकीय दृष्टि से दुर्लभ मामला है।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अनिमेष गुप्ता ने बताया कि बच्ची पीलिया (जॉन्डिस) और गंभीर खुजली की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंची थी। प्रारंभिक जांच और एमआरसीपी इमेजिंग में पता चला कि पित्ताशय (गॉलब्लाडर) से लेकर कॉमन बाइल डक्ट (सीबीडी) तक एक ट्यूमर जैसा उभार फैल चुका था जिससे पित्त नली में पूरी तरह रुकावट आ गई थी।

गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने पहले ईआरसीपी तकनीक के जरिए एक प्लास्टिक स्टेंट लगाकर पित्त के बहाव को बहाल किया। इससे लीवर पर पड़ने वाला दबाव कम हुआ और मरीज की स्थिति स्थिर हुई। इसके बाद सर्जरी (कोलेसिस्टेक्टॉमी) कर पित्ताशय व ट्यूमर को पूरी तरह निकाल दिया गया।

सर्जरी के बाद हुई बायोप्सी रिपोर्ट में इस ट्यूमर की पहचान 'इंट्राडक्टल पेपिलरी नियोप्लाज्म ऑफ द बिलियरी ट्रैक्ट' (आईपीएनबी) के रूप में हुई। यह पित्त नली में होने वाला एक दुर्लभ पूर्व-कैंसरयुक्त ट्यूमर है, जो आमतौर पर 50-70 वर्ष के लोगों में ही देखा जाता है। 13 वर्षीय बच्ची में इसका पाया जाना मेडिकल क्षेत्र में असामान्य माना जा रहा है।

 इस अनोखे मामले को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में केस रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित करने की योजना है, ताकि चिकित्सा जगत को इस दुर्लभ बीमारी के बारे में जानकारी मिल सके। सर्जरी के बाद बच्ची स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

रिपोर्टर : अनुज उपाध्याय

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