न फाइल,न पन्ने पलटने का झंझट..डिजिटल एनएबीएच से बदलेगा इलाज का अंदाज
आगरा - उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में सोमवार को डिजिटल एनएबीएच और डिजिटल स्वास्थ्य मानकों को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य अस्पतालों को डिजिटल प्रक्रियाओं से जोड़ना और उन्हें अधिक कुशल, पेपरलेस व तकनीक-संचालित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ाना था। उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. जसजीत सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र तेजी से डिजिटल परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में अस्पतालों के लिए एनएबीएच द्वारा निर्धारित डिजिटल स्वास्थ्य मानकों को समझना और उन्हें लागू करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। चूंकि कई सरकारी योजनाएँ और समावेशन (एम्पैनलमेंट) प्रक्रियाएँ तेजी से डिजिटल और पेपरलेस हो रही हैं, इसलिए अस्पतालों को भी अपनी आंतरिक व्यवस्थाओं में बदलाव लाना होगा, ताकि वे अनुपालन, दक्षता और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रह सकें। पेपर-आधारित दस्तावेज़ीकरण से डिजिटल रिकॉर्ड और वर्कफ्लो में बदलाव, स्वास्थ्य सूचनाओं की पहुँच, सटीकता, ट्रेसेबिलिटी और सुरक्षा में सुधार, अस्पताल की प्रक्रियाओं और दस्तावेज़ीकरण का मानकीकरण, रोगी सुरक्षा और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों को मजबूती, निगरानी, रिपोर्टिंग, ऑडिट और अनुपालन में बेहतरी, डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के साथ सहज एकीकरण, सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की बदलती जरूरतों के लिए अस्पतालों को तैयार करना, अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एडी बीएम) पारिस्थितिकी तंत्र में प्रभावी भागीदारी में सक्षम बनाना। डॉ जसजीत के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य अस्पतालों में इस बात की जागरूकता फैलाना है कि डिजिटल एनएबीएच क्या है, यह क्यों जरूरी है, और अस्पताल अपने दैनिक कामकाज में डिजिटल स्वास्थ्य मानकों को चरणबद्ध तरीके से कैसे लागू कर सकते हैं। साथ ही, अस्पतालों को कार्यान्वयन, प्रक्रिया विकास, कर्मचारी प्रशिक्षण और संरक्षण (हैंडहोल्डिंग) में भी पूरी सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे आवश्यकताओं को समझ सकें और डिजिटल स्वास्थ्य प्रथाओं की ओर सफलतापूर्वक परिवर्तन कर सकें।
रिपोर्टर - अनुज उपाध्याय
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