आगरा कैंट में BJP की लगातार दो जीत, जानिए 2012 से 2022 तक का पूरा इतिहास

आगरा के छावनी क्षेत्र यानी आगरा कैंट (विधानसभा सीट संख्या 87) का सियासी रण किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है! अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित इस वीआईपी सीट पर पिछले तीन चुनावों में सत्ता का पासा ऐसा पलटा कि कभी हाथी की दहाड़ गूंजी, तो कभी कमल ऐसा खिला कि विरोधी खेमे में सन्नाटा छा गया। आइए, इस हाई-प्रोफाइल सीट के सियासी सफर और पिछले तीन चुनावों के रोमांचक आंकड़ों को टटोलते हैं!

सफर की शुरुआत होती है साल 2012 के विधानसभा चुनाव से, जब इस आरक्षित सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने अपना दबदबा दिखाते हुए तहलका मचा दिया था। बसपा के टिकट पर उतरे गुटियारी लाल दुवेश ने मैदान में ऐसा दम दिखाया कि उन्होंने भाजपा के कद्दावर नेता गिर्राज सिंह धर्मेश को कांटे की टक्कर में पछाड़ दिया। गुटियारी लाल दुवेश ने 67,786 वोट पाकर जीत का परचम लहराया, जबकि गिर्राज सिंह धर्मेश 61,371 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा सपा के चंदर सेन (टपलू) 45,684 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। उस मुकाबले में गुटियारी लाल दुवेश ने 6,415 वोटों के अंतर से बाजी अपने नाम की थी और उस समय मतदान का आंकड़ा 54.45% दर्ज किया गया था।

लेकिन वक्त बदलते देर नहीं लगती और साल 2017 के महासंग्राम में राजनीतिक हवा का रुख पूरी तरह से पलट गया! इस बार बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और पिछले चुनाव में हार का सामना करने वाले डॉ. गिर्राज सिंह धर्मेश ने मैदान में उतरकर ऐसा जोरदार पलटवार किया कि पिछली बार के विजेता गुटियारी लाल दुवेश (बसपा) चारों खाने चित्त हो गए। डॉ. गिर्राज सिंह धर्मेश ने धुआंधार प्रदर्शन करते हुए 1,13,178 वोट बटोरे, जबकि बसपा के गुटियारी लाल दुवेश 66,853 वोट लेकर बहुत पीछे छूट गए। इस बार भाजपा ने 46,325 वोटों के भारी-भरकम अंतर से यह सीट बसपा से झटक ली और उस चुनाव में वोटिंग प्रतिशत बढ़कर 59.14% पहुंच गया था।

सिलसिला यहीं नहीं थाम, बल्कि साल 2022 के नियमित विधानसभा चुनाव में तो बीजेपी ने आगरा कैंट के इस किले पर अपनी पकड़ और ज्यादा मजबूत कर ली! मैदान में एक बार फिर उतरे डॉ. जी.एस. धर्मेश (गिर्राज सिंह धर्मेश) ने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखते हुए विरोधियों को धूल चटा दी और रिकॉर्ड 1,17,796 वोट हासिल किए। इस बार समाजवादी पार्टी के कुंवर चंद 69,099 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बसपा के डॉ. भारतेंद्र कुमार अरुण 54,409 वोट लेकर तीसरे पायदान पर खिसक गए और कांग्रेस के सिकंदर सिंह तो रेस से बहुत दूर नजर आए। भाजपा की जीत का यह अंतर 2017 के मुकाबले और बढ़कर 48,697 वोटों तक जा पहुंचा, हालांकि इस बार मतदान लगभग 53.4% दर्ज किया गया।

अब अगर पिछले तीनों चुनावों के नतीजों पर एक सरसरी नजर डालें, तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है:

साल 2012: बसपा के गुटियारी लाल दुवेश ने 6,415 वोटों के अंतर से बाजी मारकर सीट पर कब्जा किया।

साल 2017: भाजपा के डॉ. गिर्राज सिंह धर्मेश ने जोरदार वापसी करते हुए 46,325 वोटों के भारी अंतर से यह सीट बसपा से छीन ली।

साल 2022: भाजपा के डॉ. जी.एस. धर्मेश ने अपनी बादशाहत कायम रखते हुए 48,697 वोटों के अंतर से सपा को मात दी और लगातार दूसरी बार कमल खिलाया।

कुल मिलाकर, आगरा कैंट की जनता ने यह साबित कर दिया है कि शुरुआत में भले ही हाथी की चाल तेज रही हो, लेकिन पिछले एक दशक से इस छावनी क्षेत्र में पूरी तरह से भगवा का परचम लहरा रहा है। आने वाले सियासी रण में देखना दिलचस्प होगा कि क्या विरोधी दल इस किले में कोई नई सेंध लगा पाते हैं या बीजेपी अपना यह विजय रथ यूं ही दौड़ाती रहती है!

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