आगरा उत्तर में BJP का दबदबा! 2012 से 2022 तक कौन-कौन जीता?

ताजमहल के शहर आगरा की राजनीति में अगर किसी एक दल का सिक्का पूरी तरह से जमा हुआ है, तो वह भारतीय जनता पार्टी है! बात हो रही है आगरा उत्तर विधानसभा सीट (संख्या 89) की, जिसे बीजेपी का सबसे मजबूत और अजेय किला माना जाता है। यहां पिछले तीन चुनावों और एक उपचुनाव के नतीजे साफ गवाही देते हैं कि इस वीआईपी सीट पर कमल ऐसा खिला है कि विरोधी दल चारों खाने चित्त नजर आते हैं। आइए, इस हाई-प्रोफाइल सीट के सियासी सफर, रिकॉर्डतोड़ जीत और अंदरखाने की पूरी कहानी को टटोलते हैं!

सफर की शुरुआत होती है साल 2012 के विधानसभा चुनाव से, जब इस सीट पर बीजेपी के कद्दावर नेता जगन प्रसाद गर्ग मैदान में उतरे और उन्होंने अपने विरोधी खेमे में खलबली मचाते हुए 68,401 वोट हासिल करके शानदार जीत दर्ज की। उस चुनाव में बसपा के राजेश कुमार अग्रवाल 45,045 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे, जबकि कांग्रेस के सुमीत गुप्ता विभव और सपा के अभिनव शर्मा को पीछे छोड़ते हुए जगन प्रसाद गर्ग ने 23,356 वोटों के तगड़े अंतर से बाजी अपने नाम कर ली और उस समय मतदान का आंकड़ा 55.34% रहा था।

इसके बाद आया साल 2017 का महासंग्राम, जिसमें मोदी लहर के बीच जगन प्रसाद गर्ग ने अपने ही पिछले रिकॉर्ड को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस बार उन्होंने मैदान में ऐसा जलवा बिखेरा कि कुल 1,35,120 वोट बटोर डाले, जबकि बसपा के इंजीनियर ज्ञानेंद्र गौतम 48,800 वोट लेकर बहुत पीछे दूसरे स्थान पर रहे और सपा के अतुल गर्ग 36,739 वोटों के साथ तीसरे पायदान पर सिमट गए। जगन प्रसाद गर्ग ने इस बार जीत का अंतर सीधे छलांग लगाकर 86,320 वोटों तक पहुंचा दिया और क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ का डंका बजा दिया, जिसमें वोटिंग प्रतिशत बढ़कर लगभग 58.4% पहुंच गया था।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था लोकप्रिय विधायक जगन प्रसाद गर्ग के असामयिक निधन के कारण साल 2019 में इस सीट पर आनन-फानन में उपचुनाव कराना पड़ा। इस अग्निपरीक्षा में बीजेपी ने पुरुषोत्तम खंडेलवाल पर दांव खेला और उन्होंने पार्टी के भरोसे को पूरी तरह सही साबित करते हुए 1,05,762 वोटों के साथ धमाकेदार जीत हासिल की। हालांकि सपा के सूरज शर्मा ने 45,731 वोट पाकर टक्कर देने की कोशिश की, लेकिन पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने 60,031 वोटों के भारी-भरकम अंतर से यह बाजी जीत ली, हालांकि उपचुनाव होने के कारण उस वक्त मतदान थोड़ा गिरकर 39.7% पर सिमट गया था।

सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि साल 2022 के नियमित विधानसभा चुनाव में तो बीजेपी ने सारे पुराने रिकॉर्ड ही तोड़ डाले! मैदान में एक बार फिर उतरे पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने अपनी आंधी से विरोधियों का सूपड़ा साफ करते हुए रिकॉर्ड 1,53,817 वोट हासिल किए और इस सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बसपा के शब्बीर अब्बास 41,447 वोट पाकर दूसरे और सपा के ज्ञानेंद्र सिर्फ 34,403 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के विनोद बंसल तो रेस में बहुत पीछे छूट गए। इस बार जीत का यह विशाल अंतर बढ़कर 1,12,370 वोटों तक जा पहुंचा और जनता ने लगभग 55% मतदान के साथ यह साबित कर दिया कि आगरा उत्तर में फिलहाल कमल को चुनौती देना किसी के बस की बात नहीं है।

अब निगाहें आने वाले चुनावों और भविष्य के सियासी समीकरणों पर टिकी हैं कि क्या बीजेपी अपना यह अजेय किला बचा पाएगी या विपक्षी दल कोई नया दांव चलकर सेंध लगाने में कामयाब होंगे। आने वाले वक्त में इस सीट का असली मिजाज समझने के लिए सिर्फ हवाबाजी काफी नहीं होगी, बल्कि उन जमीनी और कड़वी सच्चाइयों की थाह लेनी होगी जो सीधे आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हैं।

सबसे पहले तो यह देखना होगा कि पिछले चुनावों से लेकर अब तक बीजेपी, सपा और बसपा के पारंपरिक वोटों के समीकरणों में किस तरह का बदलाव आया है और जनता का मूड क्या कह रहा है। इसके अलावा, शहर की गलियों में पीने के साफ पानी की किल्लत, टूटी सड़कें और जाम लगाती बदहाल यातायात व्यवस्था, कॉलोनियों में फैलती गंदगी और सीवर ओवरफ्लो की गंभीर समस्याएं आज भी बड़ा सवाल बनी हुई हैं। जनता सीधे तौर पर यह हिसाब मांगती नजर आती है कि उनके चुने हुए जनप्रतिनिधियों और विधायकों ने धरातल पर वाकई कितना विकास कार्य किया है और वादों की फाइलों में क्या कुछ अटका हुआ है।

आगामी रण में सभी प्रमुख दल किन नए चेहरों को मैदान में उतारते हैं, उनके घोषित मुद्दे क्या होते हैं और वे जनता को अपने मेनिफेस्टो से कितना लुभा पाते हैं, यही तय करेगा कि आगरा उत्तर की कुर्सी पर अगला ताज किसका सजेगा। कुल मिलाकर, यह साफ है कि आगरा उत्तर का यह सियासी अखाड़ा हमेशा हॉट रहा है और आने वाले दिनों में यहां का राजनीतिक तापमान और भी ज्यादा हाई होने वाला है!

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