हाथी की चाल धीमी पड़ी तो कैसे खिला कमल? जानिए आगरा ग्रामीण सीट की पूरी कहानी!
ताजमहल के साये में बसे आगरा जिले की आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट (संख्या 90) का सियासी अखाड़ा किसी रोमांचक मुकाबले से कम नहीं है! अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित इस वीआईपी सीट पर पिछले तीन चुनावों में सत्ता का ऊँट किस करवट बैठा है, इसकी कहानी बड़ी दिलचस्प है। कभी यहां हाथी की दहाड़ गूंजती थी, लेकिन पिछले दो चुनावों से कमल ऐसा खिला कि विरोधियों के होश उड़ गए! आइए, इस हाई-प्रोफाइल सीट के सियासी सफर और पिछले तीन चुनावों के आंकड़ों को टटोलते हैं!
सफर की शुरुआत होती है साल 2012 के विधानसभा चुनाव से, जब इस आरक्षित सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने अपना परचम लहराया था। बसपा के टिकट पर चुनावी रण में उतरे काली चरण सुमन ने मैदान में ऐसा दम दिखाया कि विरोधियों को धूल चटा दी। काली चरण सुमन ने 69,969 वोट पाकर शानदार जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी की हेमलता 51,123 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहीं। इसके अलावा कांग्रेस के उपेंद्र सिंह को 38,832 और भाजपा के ओम प्रकाश चलनीवाले को महज 22,750 वोट मिले। काली चरण सुमन ने 18,846 वोटों के अंतर से बाजी अपने नाम की थी और उस समय मतदान का आंकड़ा 58.37% दर्ज किया गया था।
लेकिन वक्त बदलते देर नहीं लगती और साल 2017 के महासंग्राम में राजनीतिक हवा का रुख पूरी तरह से पलट गया! इस बार बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और चुनावी मैदान में उतरीं हेमलता दिवाकर ने ऐसा जोरदार पलटवार किया कि पिछली बार के विजेता काली चरण सुमन (बसपा) चारों खाने चित्त हो गए। हेमलता दिवाकर ने भाजपा के टिकट पर धुआंधार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड 1,29,887 वोट बटोरे, जबकि बसपा के काली चरण सुमन 64,591 वोट लेकर बहुत पीछे छूट गए और कांग्रेस के उपेंद्र सिंह 31,312 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस बार भाजपा ने 65,296 वोटों के भारी-भरकम अंतर से यह सीट बसपा से झटक ली और उस चुनाव में वोटिंग प्रतिशत बढ़कर लगभग 63.2% पहुंच गया था।
सिलसिला यहीं नहीं थाम, बल्कि साल 2022 के नियमित विधानसभा चुनाव में तो बीजेपी ने इस सीट पर अपनी पकड़ और भी ज्यादा मजबूत करने के लिए एक बड़ा दांव खेला! पार्टी ने हेमलता दिवाकर की जगह दिग्गज नेत्री और कद्दावर नेता बेबी रानी मौर्य को चुनावी मैदान में उतारा। जनता ने भी इस फैसले पर मुहर लगाते हुए बेबी रानी मौर्य के पक्ष में बंपर मतदान किया और उन्होंने 1,37,310 वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बसपा की किरण प्रभा केसरी 60,702 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के महेश कुमार 52,731 वोट लेकर तीसरे पायदान पर रहे और कांग्रेस की स्थिति बहुत पीछे छूट गई। भाजपा की जीत का यह अंतर 2017 के मुकाबले और बढ़कर 76,608 वोटों तक जा पहुंचा, हालांकि इस बार मतदान लगभग 60.7% दर्ज किया गया।
अब अगर पिछले तीनों चुनावों के नतीजों पर एक सरसरी नजर डालें, तो तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है:
साल 2012: बसपा के काली चरण सुमन ने 18,846 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर सीट पर कब्जा किया।
साल 2017: भाजपा की हेमलता दिवाकर ने जोरदार वापसी करते हुए 65,296 वोटों के भारी अंतर से यह सीट बसपा से छीन ली।
साल 2022: भाजपा की दिग्गज नेत्री बेबी रानी मौर्य ने अपनी बादशाहत कायम रखते हुए 76,608 वोटों के विशाल अंतर से जीत हासिल की और कमल को और मजबूत कर दिया।
कुल मिलाकर, आगरा ग्रामीण की जनता ने 2012 में जहां बसपा को मौका दिया था, वहीं 2017 और 2022 के चुनावों ने यह साबित कर दिया कि अब इस सीट पर पूरी तरह से भगवा का परचम लहरा रहा है। आने वाले सियासी रण में देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या विरोधी दल इस मजबूत किले में कोई नई सेंध लगा पाते हैं या भाजपा अपना यह विजय रथ यूं ही सरपट दौड़ाती रहती है!

No Previous Comments found.