मौसम में उतार-चढ़ाव, इस फसल की खेती किसानों को देगी मोटा मुनाफा

अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसमें कहीं तेज गर्मी तो कहीं बारिश जैसी स्थिति बनी हुई है। इस बदलते मौसम के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बन गई है, जो खरीफ और कंद वाली फसलों के लिए बेहद लाभकारी मानी जा रही है। इसी आधार पर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल चयन और बुवाई को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
 
हल्दी और अदरक की खेती के लिए सही समय
 
15 मई के बाद हल्दी और अदरक की बुवाई का समय अनुकूल है। हल्दी के लिए ‘राजेंद्र सोनिया’ और ‘राजेंद्र सोनाली’ जैसी उन्नत किस्मों की सिफारिश की गई है, जबकि अदरक के लिए ‘मरान’ और ‘नदिया’ किस्में उपयुक्त बताई गई हैं। पर्याप्त नमी के कारण इन फसलों की पैदावार बेहतर होने की संभावना है।
 
खेत की तैयारी और उन्नत तकनीक का उपयोग
 
वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई की जाए और सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग किया जाए। बीजों का उपचार करना और सही दूरी व गहराई पर रोपाई करना भी आवश्यक बताया गया है, जिससे फसल स्वस्थ और अधिक उत्पादक बन सके।
 
खरीफ फसलों की तैयारी शुरू करने की सलाह
 
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खरीफ मक्का और धान की तैयारी अभी से शुरू करने की सलाह दी है। मक्का की बुवाई 25 मई के बाद की जा सकती है, जबकि धान की रोपाई के लिए ‘गजेंद्र’ किस्म को उपयुक्त बताया गया है। इसके साथ ही ओल (अरबी) की खेती के लिए भी यह समय अनुकूल माना जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सके।

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