बौद्ध–मातंग भाईचारा बचाने के लिए प्रयास जरूरी : अजिंक्य चांदणे
अहिल्यानगर : श्रीगोंदा में 21 अप्रैल को आयोजित महामानव विचार प्रबोधन यात्रा मे महात्मा फुले, डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर, संत गाडगे बाबा की संयुक्त जयंती सभा में वक्ता अजिंक्य चांदणे ने बौद्ध और मातंग समाज के पारंपरिक भाईचारे को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से कायम यह भाईचारा अब अंतिम दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है, जो बेहद गंभीर विषय है।
अपने संबोधन में चांदणे ने कहा कि इस भाईचारे को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन इसे बचाने के लिए समाज की ओर से अपेक्षित प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। विरोधी ताकतों के हमलों को रोकने की क्षमता समाज में होते हुए भी इस दिशा में चिंता और पहल की कमी दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि बौद्ध और मातंग समाज का ऐतिहासिक भाईचारा सामाजिक एकता की मिसाल रहा है, जिसे बनाए रखने के लिए सभी को आगे आना होगा। उनके इस वक्तव्य ने सभा में उपस्थित लोगों के बीच गंभीर चर्चा को जन्म दिया।इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।
रिपोर्टर : अमर घोडके

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