'संपूर्ण कर्जमाफी दो, नहीं तो संघर्ष और तेज होगा'
अहिल्यानगर : महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित कर्जमाफी योजना में लगाई गई शर्तों को रद्द कर किसानों को संपूर्ण कर्जमाफी देने, कृषि उपज को उचित समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान करने तथा किसानों के विभिन्न लंबित मुद्दों का तत्काल समाधान करने की मांग को लेकर श्रीगोंदा तालुका के कोलगांव फाटा स्थित नगर-दौंड महामार्ग पर किसानों, सर्वदलीय नेताओं और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने जोरदार चक्का जाम आंदोलन किया। आंदोलन के बाद तहसीलदार मिलिंद जाधव को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान किसान नेता राजेंद्र (आबा) म्हस्के ने राज्य सरकार की कर्जमाफी नीति की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि किसानों को लाभ से वंचित रखने के लिए सरकार ने कर्जमाफी पर कई शर्तें लागू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों को कर्जमुक्त करना चाहती है तो किसानों का पूरा कर्ज माफ कर सातबारा कोरा किया जाए तथा उत्पादन लागत का दोगुना समर्थन मूल्य दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं की अनदेखी जारी रही तो गांव-गांव में आंदोलन तेज किया जाएगा।
हेमंत नलगे ने कर्जमाफी योजना को किसानों के साथ छलावा बताते हुए कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत और गिरते बाजार भाव के कारण किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। उन्होंने सभी फसलों को समर्थन मूल्य और संपूर्ण कर्जमाफी की मांग की। झेंडे महाराज ने सरकार से चुनावी वादे के अनुसार तत्काल पूर्ण कर्जमाफी लागू करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो चक्का जाम आंदोलन के बाद रेल रोको जैसे उग्र आंदोलन भी किए जाएंगे।
हरिदास आबा शिर्के ने कहा कि किसानों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने 22 जून को तहसील कार्यालय के समक्ष आयोजित होने वाले आंदोलन में बड़ी संख्या में किसानों से शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों की लड़ाई किसानों को ही लड़नी होगी और इसके लिए सभी संगठनों की एकजुटता आवश्यक है। आंदोलन में राजेंद्र म्हस्के, अनिल घनवट, हेमंत नलगे, बाळासाहेब नाहाटा, झेंडे महाराज, हरिदास आबा शिर्के, बाळासाहेब नलगे, पुरुषोत्तम लगड, मारुति भापकर, राजेंद्र नागवडे, भाऊसाहेब नेटके, स्मितल वाबळे सहित विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
रिपोर्टर : अमर घोडके
No Previous Comments found.