महाराष्ट्र की सत्ता अपने हाथ में लेकर ही भटके-विमुक्त समाज के मुद्दों का समाधान संभव : सुजात दादा आंबेडकर
अहिल्यानगर : भटके-विमुक्त एवं आदिवासी समाज की वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब महाराष्ट्र की सत्ता समाज के हाथों में आए। इसके लिए पूरे भटके-विमुक्त और आदिवासी समाज को एकजुट होकर राजनीतिक भागीदारी बढ़ानी होगी। यह बात वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात दादा आंबेडकर ने कही।
वे संत कबीर जयंती के अवसर पर भटके-विमुक्त आदिवासी संयोजन समिति द्वारा श्रीगोंदा तालुका के लिंपणगांव स्थित सिद्धेश्वर मंदिर परिसर के सभागार में आयोजित 'मुशाफिरी यात्रा' के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
सुजात दादा आंबेडकर ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाले भटके-विमुक्त समाज को आजादी के 78 वर्ष बाद भी आवास, जमीन, राशन और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि वंचित बहुजन आघाड़ी समाज को सत्ता में भागीदारी दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने एडवोकेट डॉ. अरुण जाधव के नेतृत्व को मजबूत करने की भी अपील की।
प्रसिद्ध साहित्यकार लक्ष्मण गायकवाड़ ने कहा कि आज भी भटके-विमुक्त समाज पाल (अस्थायी झोपड़ियों) में रहने को मजबूर है, जबकि सत्ता में बैठे लोग आलीशान भवनों में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को अपनाकर, शिक्षा को प्राथमिकता देकर और समाज को संगठित करके ही परिवर्तन संभव है।
एडवोकेट डॉ.अरुण जाधव ने कहा कि वर्तमान गृहगणना और जनगणना प्रक्रिया में भटके-विमुक्त समाज का समुचित पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। मुशाफिरी यात्रा के माध्यम से बड़ी संख्या में समाज के लोगों की गृहगणना सुनिश्चित हुई है तथा उनकी समस्याएं सरकार तक पहुंचाई गई हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
इस अवसर पर अंबरसिंह चव्हाण, बाळासाहेब बळे, भालचंद्र सावंत, अनिल जाधव, संतोष चोळके, अनिल सावंत, लता सावंत, अनिल घनवट और संतोष जौंजाळ सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संविधान की प्रस्तावना पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद सभी अतिथियों का भारतीय संविधान की प्रस्तावना की प्रति भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भटके-विमुक्त समाज के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं समाजबंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम की प्रस्तावना बापू ओहोळ ने की, संचालन संतोष चव्हाण ने किया तथा आभार प्रदर्शन उमाताई जाधव ने किया।
रिपोर्टर :अमर घोडके
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