आखिर क्यों रखा जाता है अहोई अष्टमी का व्रत? पढ़ें ऐसी कथा, जिसे हर मां को जानना चाहिए!
हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करती हैं और शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और विशेष उपाय।
अहोई अष्टमी 2026 कब है?
अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जाएगा।
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पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:24 से 6:41 बजे तक
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तारों के दर्शन: शाम लगभग 5:48 बजे
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अष्टमी तिथि: 1 नवंबर दोपहर 2:51 बजे से 2 नवंबर दोपहर 1:10 बजे तक।
ध्यान दें : समय लखनऊ के अनुसार है। स्थानीय पंचांग में थोड़ा अंतर हो सकता है।
अहोई अष्टमी की पूरी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की पत्नी के सात बेटे थे। एक दिन वह दीपावली की तैयारी के लिए जंगल में मिट्टी खोदने गई। इसी दौरान उसकी कुदाल से गलती से स्याहू (साही) के एक बच्चे की मृत्यु हो गई।
इस घटना से दुखी स्याहू ने उसे श्राप दे दिया। कुछ समय बाद साहूकार के सातों पुत्रों की मृत्यु हो गई। दुखी होकर साहूकार की पत्नी ने पश्चाताप किया और अहोई माता की शरण में गई।
उसने पूरी श्रद्धा से अहोई अष्टमी का व्रत रखा और माता से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उसे संतान सुख का आशीर्वाद दिया।
तभी से मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली माताओं की संतान पर अहोई माता अपनी कृपा बनाए रखती हैं।
अहोई अष्टमी की पूजा विधि
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सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
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शाम को अहोई माता की तस्वीर या चित्र स्थापित करें।
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माता को रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें।
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घी का दीपक जलाकर अहोई अष्टमी की कथा सुनें।
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माता की आरती करें और संतान की खुशहाली की प्रार्थना करें।
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शाम को तारों को जल अर्पित करके व्रत खोलें।
अहोई अष्टमी के 5 खास उपाय
1. दूध-भात का भोग: अहोई माता को खीर या दूध-भात अर्पित करें।
2. तारों को अर्घ्य: शाम को तारों को जल अर्पित करके संतान की लंबी आयु की प्रार्थना करें।
3. गाय को चारा खिलाएं: इस दिन गौ माता को हरा चारा खिलाना शुभ माना जाता है।
4. जरूरतमंद बच्चों को दान: गरीब बच्चों को फल, भोजन या कपड़े दान करें।
5. घी का दीपक जलाएं: शाम की पूजा में दीपक जलाकर परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
अहोई अष्टमी पर क्या करें और क्या न करें?
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पूजा के समय मन को शांत और पवित्र रखें।
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किसी जीव को नुकसान न पहुंचाएं।
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जरूरतमंदों की सहायता करें।
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परिवार में प्रेम और सद्भाव बनाए रखें।
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स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर निर्जला व्रत रखने से बचें।
अहोई माता से करें यह प्रार्थना
हे अहोई माता! मेरी संतान को लंबी आयु, अच्छा स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करें। उसके जीवन के सभी संकट दूर करें और हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।
अहोई अष्टमी मां और संतान के अटूट प्रेम का प्रतीक है। इस दिन माताएं अपनी संतान की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं और अहोई माता से आशीर्वाद मांगती हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा और प्रार्थना से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आप सभी को अहोई अष्टमी 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।

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